नारनौल। क्षेत्र में कुश्ती खेल काफी लोकप्रिय है। धार्मिक कार्यक्रमों में आयोजित होने वाले दंगल में अनेक नामी पहलवान भाग लेते हैं। कुश्ती के प्रति रुझान को देखते हुए भूपेंद्र अखाड़े में पहलवान तैयार किए जा रहे हैं।
भूपेंद्र आखाड़ा साल 2013 में शुरू हुआ था। 12 वर्षों में अखाड़े में अनेक पहलवानों ने कुश्ती के गुर सीखकर प्रतियोगिताओं में परचम लहराया है। अखाड़े में कुश्ती के गुर सीखने वाले पहलवानों ने सरकारी नौकरियां भी प्राप्त की हैं। कुछ पहलवान ऐसे भी हैं जिन्होंने अखाड़े में ही कुश्ती सीखने के बाद ही छोटे बच्चों को कुश्ती के दांव-पेच सिखा रहे हैं।
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भूपेंद्र अखाड़े के संचालक भूपेंद्र पहलवान ने 2013 में अखाड़ा शुरू किया था। भूपेंद्र का बचपन से कुश्ती से गहरा लगाव था। उन्होंने हरियाणा पुलिस में कार्यरत अजीत पहलवान से कुश्ती के गुर सीखे और अनेक दंगलों में भाग लिया। भूपेंद्र पहलवान ने 21000 से 51000 रुपये तक की अनेक कुश्तियां जीत कर क्षेत्र का नाम रोशन किया। साल 2013 में महाराष्ट्र में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता के दूसरे राउंड की कुश्ती में वह चोटिल हो गए। गंभीर चोट के कारण भूपेंद्र पहलवान ने कुश्ती को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और अखाड़े की शुरुआत की।
वर्जन
हमारा उद्देश्य कुश्ती के प्रति लगाव रखने वाले बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण देना है। अखाड़े में कुश्ती के गुर सिखाने वाले अनेक पहलवानों ने दंगल व अनेक प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया है। अभी अखाड़े में करीब 20 बच्चे कुश्ती के गुर सीख रहे हैं। -भूपेंद्र पहलवान,संचालक, भूपेंद्र अखाड़ा, नारनौल।