फोटो नंबर-06नारनौल स्टेडियम में जूड़ो का अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद
नारनौल। सरकार खेलों को बढ़ावा देने की बात कर रही है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में अधिक से अधिक खेल नर्सरियां खोली जा रही हैं, लेकिन शहर के एकमात्र नेताजी सुभाष चंद बोस स्टेडियम की बात करें तो यहां 6 खेलों के कोच तक नहीं हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बगैर कोच और प्रशिक्षण के खिलाड़ी कैसे पदक लाएंगे। कैसे अपने जिले व प्रदेश का नाम रोशन कर पाएंगे।
हालांकि इस संबंध में जिला खेल अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। उम्मीद जताई है कि जल्द ही रिक्त पदों पर कोच की नियुक्ति कर दी जाएगी। खेल स्टेडियम में विभाग की ओर से जूडो और तीरंदाजी के लिए खेल नर्सरी अलॉट है। इसमें दोनों खेलों के 70 बच्चे निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इन बच्चों को तीरंदाजी कोच विनय कुमार व जूडो कोच विवेक कुमार प्रशिक्षित कर रहे हैं।
इंसेट
इन खेलों के नहीं हैं कोच
स्टेडियम में लॉन टेनिस, कबड्डी, बास्केट बॉल, हैंडबॉल व खो-खो सहित भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी के भी कोच के पद रिक्त हैं। ऐसे में बिना गुरु के खिलाड़ी करें भी तो क्या करें।
ये कोच हैं मौजूद:
स्टेडियम में तीरंदाजी, जूडो, कुश्ती, बॉक्सिंग, फुटबॉल, एथलेटिक्स, क्रिकेट व बॉलीबॉल के कोच हैं और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। परिणामस्वरूप अभी हाल ही में गुजरात के नाडियाड में हुई तीरंदाजी प्रतियोगिता में यहां का एक खिलाड़ी गोल्ड मेडल लेकर लौटा है।
वर्जन:
कोच के खाली पदों के संबंध में उच्चाधिकारी को अवगत करा दिया गया है। साथ ही परिजनों से अपील है कि अपने बच्चों को नियमित स्टेडियम भेजें, ताकि बच्चा असामाजिक गतिविधियों से से दूर रहे। खेल से उसका शारीरिक व मानसिक विकास भी बेहतर हो सके।-नरेंद्र सिंह, जिला खेल अधिकारी नारनौल।