नारनौल। इस समय ऑटो चालकों की हालत काफी खराब होती जा रही है। एक तरफ वैश्विक तनाव के चलते पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने से खर्च बढ़ गया है तो दूसरी तरफ तेज गर्मी और लू ने सवारी भी कम कर दी है।
ऑटो चालकों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक गर्मी के कारण लोग घरों से बाहर ही नहीं निकलते जिससे कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं बढ़े हुए ईंधन दामों से ऑटो की किस्त और मेंटेनेंस का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। चालकों का कहना है कि अगर कम से कम 5 रुपये किराया बढ़ाया जाए, तभी थोड़ी राहत मिल सकती है।
शहर में करीब डेढ़ साल पहले ऑटो किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये किया गया था जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 20 से 30 रुपये तक चल रहा है। अब फिर से किराया बढ़ने की संभावना से आम लोगों पर भी असर पड़ सकता है।
इधर, बढ़ते ईंधन दामों के बीच ई-रिक्शा लोगों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं। शहर में करीब 30-40 ई-रिक्शा चल रहे हैं जिनमें सफर सस्ता भी है और चालकों को भी ठीक-ठाक कमाई हो रही है। मंडियों में लोडिंग ई-रिक्शा की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
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करीब 8 हजार रुपये की किस्त और 2 हजार रुपये मरम्मत सहित 10 हजार रुपये प्रतिमाह का खर्च है। दिन-भर ऑटो चलाने के बाद किस्त, मरम्मत व ईंधन का खर्च निकालने के बाद केवल 200 से 300 रुपये की बचत मुश्किल से निकल पाती है।
-सुनील, गांव खोड़मा
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ईंधन के दाम में बढ़ोतरी के साथ-साथ तेज धूप व लू के कारण भी बचत निकालना मुश्किल बना हुआ है। क्योंकि दोपहर के समय बहुत कम लोग आवागमन करते हैं। कई बार तो शहर का एक चक्कर लगाने पर केवल 60 से 80 रुपये ही मिल पाते हैं।
-सतीश कुमार, मोहल्ला वैध कॉलोनी