फोटो संख्या:57-पंडित राहुल भारद्वाज--संवाद
महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है। अक्षय तृतीया को (अबूझ) सर्वश्रेष्ठ सिद्ध मुहूर्त माना गया है।
यानी इस दिन बिना कोई मुहूर्त कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य कर सकते हैं। भूमि, भवन, वाहन की खरीदारी कर सकते है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया अक्षय तृतीया व भगवान परशुराम जन्मोत्सव 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस बार आखा तीज पर अक्षय तृतीया के दिन स्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शोभन योग और रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। जो किसी भी शुभ कार्यों को करने और दान पुण्य के लिए विशेष फलदायी बताया है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में विराजमान रहते हैं। कई ग्रह शुभ स्थिति में रहते हैं।
इस कारण से ये अपने आप में शुभ मुहूर्त बन जाता है। जो किसी भी जप, तप, ज्ञान, पूजा-पाठ अनुष्ठान, हवन दान, स्नान के फायदेमंद बताया गया है। दान का कई गुना फल मिलता है।
तृतीया तिथि का प्रारंभ 29 अप्रैल को शाम 5:30 बजे से होगा और 30 अप्रैल को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी। इस कारण भगवान परशुराम जन्मोत्सव 29 अप्रैल को प्रथम या व्यापिनी तृतीया में भी मनाया जाएगा। मान्यताओं अनुसार संसार में आठ ऐसे चिंरजीवी हैं, जो युगों-युगों से इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। उन में से एक भगवान परशुराम भी हैं। इस तिथि को प्रदोष व्यापिनी रूप में ग्रहण करना चाहिए।