संवाद न्यूज एजेंसी
कनीना। गांव ककराला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता की भावपूर्ण कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथावाचक आचार्य भरत शास्त्री ने श्रीकृष्ण की तरह मित्र धर्म निभाने का आह्वान किया। कहा कि भागवत कथा सुनने से आत्मा में जागृति आती है। व्यक्ति में सद्गुणों का प्रादुर्भाव होता है। हमें मौत और ईश्वर को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से अपनी मित्रता निभाते हुए सच्ची मित्रता का संदेश दिया। उन्होंने सुदामा के महल पहुंचने पर सत्कार किया तो स्वयं सुदामा भी भावविभोर हो गए थे। संकोचवश वह अपने मित्र से कुछ मांग भी नहीं सके लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उनके पहुंचने से पहले ही हर सुख-सुविधा उपलब्ध करा दी।
समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट ने व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य भरत शास्त्री को शॉल ओढ़ाकर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर राष्ट्र गौरव अवाॅर्ड से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि धर्म तथा परोपकार का प्रचार करने वाले ही असली राष्ट्र गौरव हैं। इसलिए हमें साधु संत, धर्म प्रचारक, समाजसेवक तथा सर्वहित की सोच रखने वाले लोगों का हमेशा सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर सुनीता, माया देवी, कृष्णा, राजेश, कमलेश, ललिता, रिसाली, रामरती, कौशल्या, अनिता, फूलवती उपस्थित रहीं