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कैशियर का खेल, 2.30 करोड़ लेकर चंपत

Tue, 08 Nov 2016 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़ नगर के राव तुलाराम चौक पर स्थित स्टेट बैंक आफ पटियाला में कैशियर ने करोड़ों रुपये का गबन कर लिया और वर्षों तक किसी को भनक तक नहीं लगी। यह गबन करने के बाद आरोपी फरार हो गया। जब बैंक मैनेजर ने जांच करवाई तो पता चला कि कैशियर ने नगर की ढ़ाणी लंगड़ावाली, माजरा खुर्द गांव की पंचायत और पायगा निवासी महिला के खातों से करीब 2.30 करोड़ रुपये गायब कर लिए हैं। खातों में नाम मात्र के ही रुपये बचे हैं। अब बैंक अधिकारियों ने आरोपी कैशियर को बर्खास्त कर दिया है। सोमवार को बैंक के मैनेजर जितेंद्र कुमार को छोड़कर पूरा स्टाफ बदल दिया है, यहां तक कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी बदल दिया है। एसपी ने भी आरोपी के केस दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
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 शातिर कैशियर ने गांव लंगड़ावाली के तीन भाईयों के करीब 51 लाख, ग्राम पंचायत  माजरा खुर्द के करीब एक करोड़ 75 लाख रुपये और गांव पायगा की बुजुर्ग महिला के लगभग साढ़े पांच लाख रुपये गायब किए हैं। यह गबन दो वर्ष पूर्व यानी 2014 में ही किया जा चुका था लेकिन बैंक के किसी भी कर्मचारी को इस बात की भनक तक नही लगी। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब 6 अक्तूबर एक उपभोक्ता अपने रुपये निकलवाने बैंक पहुंचा। जब बैंक में खाते में केवल 24 लाख रुपये होने का पता चला तो वह दंग रह गाया।
नगर की लंगड़ा वाली ढ़ाणी निवासी बाबूराम ने बैंक मैनेजर को लिखित शिकायत दी है। इसमें उसने बताया कि उसके पिता चंदगीराम ने 1 करोड़ 30 लाख रुपये की अपनी जमीन बेची थी। जमीन के रुपयों में से पिता ने तीनों बेटों हजारी, बाबूलाल और रामफल को 35-35 लाख रुपये दे दिए। 25 लाख रुपये स्वयं के पास रखे थे। चारों ने 12 फरवरी 2014 को कैशियर राजबीर को 1 करोड़ 30 लाख रुपये देकर बैंक में खाता खुलवाया था। कैशियर ने रात्रि के 9.30 बजे तक रुपयों की गिनती की। उसके बाद उसने स्वयं हस्ताक्षरित चार पासबुक बनाकर उनको सौंप दी। जब उन्हें रुपये की जरूरत पड़ती तो वह मात्र 49 हजार रुपये ही निकाल कर देता था और पैसे निकलवाने के फार्म पर साइन करवा लेता था। जब वो पासबुक में इंट्री करवाने के लिए कहते तो आगे का समय देकर बहला देता था। बाबूलाल ने बताया कि उसके 35 लाख में से अभी तक साढ़े 27 लाख रुपये निकलवाए हैं। उसके खाते से साढ़े सात लाख रुपये का गबन किया गया है। इसके अलावा ब्याज भी उसे एक रुपया नहीं मिला। जबकि पिता चंदगी राम और हजारी के बैंक रिकार्ड में खाते ही नहीं हैं। पीड़ितों की मानें तो कैशियर ने चंदगीराम के तीन लाख, बाबूलाल के 10 लाख, रामफल के 24 लाख और हजारी के 14 लाख रुपये गबन किए हैं। इस तरह पिता-पुत्रों के करीब 51 लाख रुपये का गबन किया गया है। इसके अलावा गांव पायगा की सुस्मृति के साढ़े पांच लाख रुपये भी निकाल लिए गए हैं। उसकी कापी में 17 इंट्री हैं जबकि बैंक रिकार्ड में 11 इंट्री दिखाई गईं हैं।
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ग्राम पंचायत के खाते से पौने दो करोड़ गायब
गांव माजरा खुर्द के सरपंच भीम ने बताया कि सरकार ने 2012 में कनीना रोड पर रेस्ट हाउस बनाने के लिए ग्राम पंचायत की जमीन ली थी। उसके रुपये सरकार ने ग्राम पंचायत माजरा के खाते में डाल दिए थे। पंचायत की तत्कालीन सरपंच लक्ष्मी देवी ने 3 अप्रैल 2014 में पंचायत के नाम 1.50 करोड़ रुपये की और 24 लाख रुपये की एफडी करवाई थी। इसके अलावा दो एफडी ढाई लाख रुपये की और थीं। यानी कुल चार एफडी पंचायत की थी। उसने बताया कि एफडी हर साल रिन्यू हुई है। 3 नवंबर को बैंक उन्होंने बैंक से जानकारी ली तो पता चला कि बैंक में तो केवल तीन एफडी हैं। इसमें दो में 0-0 बैंलेंस हैं जबकि सबसे कम रुपये वाली एफडी में पूरे पैसे हैं।

यूं हुआ मामले का खुलासा
बीती 6 अक्तूबर को जब बाबूलाल एवं उसके भाई को जमीन की रजिस्ट्री के लिए रुपये निकलवाने थे तो उसने कैशियर से बातचीत की। कैशियर उस दौरान बैंक के बाहर ही था जबकि आन रिकार्ड वह दो दिन की छुट्टी पर था। उसने सुबह 11 बजे से सायं पांच बजे तक उन लोगों को चक्कर कटवाए। कैशियर ने उनसे कहा कि बैंक में रुपये ही नहीं आ रहे हैं इतनी राशि नहीं दे सकता। एक दो लाख रुपये वह दिला सकता है। बाबूलाल एवं उसके भाइयों ने बैंक में हल्ला कर दिया तो बैंक मैनेजर तक यह बात गई। इसके बाद बैंक मैनेजर को इस गबन का पता चला। बैंक मैनेजर ने बहुत से खातों की जांच की तो उनमें से गांव माजरा की पंचायत का मामला भी निकलकर आया।

कैशियर को बर्खास्त किया, एसपी से मिलेंगे
काम करने के लिए कुछ पावर कर्मचारियों को दी जाती है। उसी पावर का कैशियर ने दुरुपयोग किया है। जांच चल रही है, 2014 की पुरानी रिपोर्ट निकाली जा रही है। 7 अक्तूबर को उच्च अधिकारियों की टीम बैंक में जांच के लिए आई थी। सब कुछ जांच करने के बाद 15 अक्तूबर को कैशियर को बर्खास्त कर दिया गया है। 3 नवंबर को उसके खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दी है। सोमवार को पुलिस अधीक्षक से भी वे मिले हैं, पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
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- जितेंद्र कुमार, बैंक प्रबंधक।
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