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बिजली निगम ने जिले में 95 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों के कनेक्शन काटे

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। प्रदेश सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा के गृह जिले महेंद्रगढ़ 95 प्राथमिक व मिडिल स्कूलों के बिजली कनेक्शन पिछले छह माह से कटे पड़े है। जिनकी अदायगी के लिए स्कूल मुखिया को समय पर बजट नहीं मिला पा रहा है। इसका खामियाजा कही न कही विद्यार्थियों को भीषण गर्मी में पढ़ाई कर भुगतना पड़ रहा है। वहीं बिजली के अभाव में स्कूलों में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए एजुसेट सिस्टम व बायोमैट्रिक हाजिरी मशीन भी खराब है। जबकि विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
अकेले नांगल चौधरी खंड में 54 स्कूलों के बिजली कनेक्शन कटे हुए है। जिनमें 39 प्राथमिक स्कूल तथा 15 माध्यमिक स्कूल शामिल है। इसके बाद महेंद्रगढ़ खंड के 28 स्कूल तथा नारनौल खंड के 13 प्राथमिक स्कूलों बिजली कनेक्शन कटे हुए है। वहीं, विभागीय सूत्रों की माने तो जिले के सभी ब्लॉकों से 40 से अधिक प्राथमिक स्कूलों में बिजली कनेक्शन कटे पड़े है।
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कनेक्शन कटने का मुख्य कारण स्कूलों को समय पर बजट नहीं मिलना बताया गया है, क्योंकि शिक्षा निदेशालय द्वारा मार्च-अप्रैल माह में ही स्कूलों के लिए बजट निर्धारित किया जाता है। इसमें ही बिजली बिल का बजट शामिल होता है। जोकि स्कूलों में आने वाले बिलों के लिए नाकाफी होता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन समय पर बिल जमा नहीं करवा पाता है और बिल धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जोकि आगामी बजट मिलने तक काफी अधिक हो जाता है। जिसके बाद स्कूल प्रबंधक निगम को यह राशि जमा नहीं करवा पाता है और निगम को बिल की राशि अधिक हो जाने के कारण स्कूलों का कनेक्शन काटना पड़ता है।
बता दें कि जिला महेंद्रगढ़ में 95 सरकारी स्कूलों का कनेक्शन शिक्षा विभाग द्वारा बिजली बिल का भुगतान समय पर नहीं किए जाने के कारण निगम द्वारा 6-8 माह पूर्व काट चुका है। परंतु शिक्षा विभाग ने अभी तक इन स्कूलों में बिजली कनेक्शन को चालू करवाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। यह प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के गृह क्षेत्र के हालात है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अन्य जिलों के क्या हालात हो सकते है। इससे सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने की दावों की भी हवा निकल गई है।

बिना कनेक्शन बायोमैट्रिक हाजिरी और एजुसेट सिस्टम बने शोपीस
बिना बिजली कनेक्शन के स्कूलों में लगी बायोमैट्रिक हाजिरी की मशीन व एजुसेट सिस्टम शोपीस बनकर रह गए है। बायोमैट्रिक हाजिरी नहीं लगने से शिक्षक अपनी मनमर्जी से स्कूल आते और जाते है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है। वहीं विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से शिक्षा देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए एजुसेट सिस्टम भी धूल फांक रहे है।

कर्मचारियों ने जानकारी न देने के ढूंढे बहाने
अटेली-कनीना ब्लॉक के बीईओ कार्यालय में बिजली कनेक्शन कटे स्कूलों से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया तो वहां बैठे कर्मचारियों ने कोई न कोई बहाना बनाकर जानकारी देने से मना कर दिया। इससे जाहिर होता है कि कहीं न कहीं कर्मचारी अपनी खामियों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।

बजट का अभाव बना कनेक्शन कटने का कारण
विभागीय सूत्रों के अनुसार स्कूलों को बिजली बिल भरने के लिए मिलने वाला बजट समय पर नहीं मिल पाता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन समय पर बिजली बिल जमा नहीं करवा पाता। शिक्षा निदेशालय हर वर्ष स्कूलों के लिए मार्च-अप्रैल में बजट जारी करता हैै। जिसमें स्कूलों को निर्धारित बिजली बिल की राशि नहीं मिलने के कारण वे पूरी राशि जमा नहीं करवा पाते और यह राशि आगामी बजट तक इतनी बढ़ जाती है कि इसे एक साथ जमा करवाना संभव नहीं हो पाता। इस कारण निगम स्कूलों के कनेक्शन काट देता है।
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वर्जन
जिन स्कूलों से बिजली बिल से संबंधित डिमांड आई है उन्हें बजट मुहैया करवाया गया है। आगे भी जिन स्कूलों द्वारा बिजली बिल के लिए डिमांड आएगी, उन्हें बजट दे दिया जाएगा। अगर बजट कम पड़ता है तो उच्चाधिकारियों के पास डिमांड भेजी जाएगी।
- अजीत सांगवान, डीईईओ नारनौल।
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