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विशेषज्ञों की कमेटी करेगी जिले के पर्यावरण के पहलुओं की छानबीन

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जिले में अवैध स्टोन क्रशर घोटाले के मामले में इंजीनियर तेजपाल यादव की याचिका पर एनजीटी में चल रहे मुकदमे में एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने हाल ही में बहु प्रतीक्षित फैसला दिया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा कि सभी 72 स्टोन क्रशर, जो पूर्व के आदेश में बंद किए जा चुके हैं व जिनकी एनओसी रद्द की जा चुकी है, उनके प्लांटों को पूरी तरह से सील किया जाए। इसके साथ-साथ एनजीटी के 3 दिसंबर 2020 के वहन क्षमता, स्वास्थ्य जांच, पर्यावरणीय पहलुओं पर दिए गए जांच के आदेश के बाद जो जांच की गई, उसमें पर्यावरणीय वहन क्षमता अत्यधिक खराब पाई गई है। एनजीटी ने जिला प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि महेंद्रगढ़ जिले में प्रदूषण के हालात बद से बदतर है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों को यूं ही मरने के लिए छोड़ दिया गया है और स्टोन क्रशर संचालन के लिए न्यूनतम निर्धारित मानदंडों का पालन भी नहीं किया गया।
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एनजीटी ने एक उच्च स्तरीय छह सदस्य विशेषज्ञ कमेटी का गठन करते हुए कहा कि यह कमेटी पूरे जिले के पर्यावरण व अन्य सभी पहलुओं की छानबीन करेगी। कमेटी में आईआईटी दिल्ली के वायु प्रदूषण मामले के विशेषज्ञ सदस्य, सीपीसीबी के सदस्य, एचएसपीसीबी के सदस्य, डीएम महेंद्रगढ़, जोन के वन संरक्षक, हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक के नामित श्वास रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। जोकि पूरे क्षेत्र का दौरा करके एक-एक बिंदु पर अपनी एक रिपोर्ट सौंपेंगे। एनजीटी की बनाई गई छह सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ कमेटी को 3 महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपनी है। मामले की अगली तारीख 7 अप्रैल 2022 को निर्धारित की गई है।
एनजीटी के आदेश पर बंद किए गए जिले के 72 स्टोन क्रशर
3 दिसंबर 2020 को एनजीटी ने अपने 24 जुलाई 2019 के आदेश को दोहराते हुए जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशर बंद करने के आदेश दिए थे। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को कार्रवाई के आदेश व मापदंड पर अवैध साबित हुए 72 स्टोन क्रशरों के अलावा जिले के अन्य स्टोन क्रशरों के खिलाफ पर्यावरण प्रदूषण व वहन क्षमता संबंधित सभी पर्यावरणीय पहलुओं पर जांच के आदेश व महेंद्रगढ़ जिले के सभी क्रशर प्रभावित गांवों की स्वास्थ्य जांच के आदेश माननीय एनजीटी ने जिला प्रशासन व हरियाणा सरकार को दिए थे। इसके बाद सरकार द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में जिले में स्टोन क्रशरों के 18 समूह (क्लस्टर) बताए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में लगभग आधा दर्जन से एक दर्जन स्टोन क्रशर हैं। प्रदूषण के भार की वजह से महेंद्रगढ़ जिले की पर्यावरणीय वहन क्षमता नकारात्मक पाई गई है। इस रिपोर्ट में हरियाणा प्रदूषण विभाग ने दाखिल अपने जवाब में कहा कि महेंद्रगढ़ जिले में किसी भी नई स्टोन क्रशर को एनओसी न दी जाए। इस रिपोर्ट के अनुसार डीसी नारनौल ने सभी अवैध स्टोन क्रशरों पर औसतन 4 से 5 लाख रुपये जुर्माना भी किया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में प्रतिवर्ष वायु से उत्पन्न बीमारियों में 100 प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। इसके साथ सबसे गंभीर व महत्वपूर्ण तथ्य यह बताया गया कि वायु से उत्पन्न बीमारियों की वजह से महेंद्रगढ़ जिले में प्रतिवर्ष अनेक लोग मर रहे हैं।
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