हरियाणा प्रदेश बनने के सात वर्ष बाद जिला महेंद्रगढ़ में सिविल अस्पताल बनाया गया था। तब से लेकर अब तक इस अस्पताल में मात्र 25 बेड की बढ़ोत्तरी हुई है। अस्पताल में न तो आधुनिक मशीनों की सुविधाएं हैं न ही पूरे चिकित्सक हैं। जिसके कारण यहां आये घायलों का प्राथमिक उपचार करने के बाद रेफर कर दिया जाता है । घायलों में कुछ तो रोहतक जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। अस्पताल में हर रोज 700 ओपीडी आती हैं तथा महीने में लगभग 50 से अधिक घायल आते हैं।
जिला महेंद्रगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं आज भी बदहाल हैं। नगर की जनसंख्या तो बढ़ी लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई। गौर फरमाए तों इसके साथ के जिलों के अस्पताल हाईटेक हो चुके हैं परंतु महेंद्रगढ़ की सिविल अस्पताल आज भी मशीनों के लिए तरस रहा है। पुराने जिले एवं जनसंख्या को देखते हुए इस अस्पताल को अभी तक ट्रांमा सेंटर बना दिया जाना चाहिए था परंतु किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। अगर आज महेंद्रगढ़ का रेफर अस्पताल पीछे है तो इस का मुख्य कारण यहां की राजनीति उपेक्षा है। जिले का स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद भी महेंद्रगढ़ को कुछ नहीं मिला। मनो सरकार के समय प्रत्येक जिले में बनने वाला एम्स भी इस नगरी को नहीं मिला, न ही इसके लिए किसी ने प्रयास किए हैं।
11 चिकित्सकों में 7 के पद भरे
उपस्वास्थ्य केंद्र में ऑन रिकार्ड कुल 11 चिकित्सकों के पद हैं जिनमें से 7 ही पद भरे हुए हैं। अस्पताल महेंद्रगढ़ में सिविल सर्जन, एमडी, फिजिशियन, नेत्र विशेषज्ञ तथा हड्डियों के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। लोगों को निजी अस्पतालों में जाकर ही अपना ईलाज करवाना पड़ता है। जिससे उनके आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सफाई कर्मचारी तथा लैब अटेंडेंट की निर्धारित पद भी रिक्त पड़े हुए हैं।
नहीं हैं आधुनिक मशीनें
महेंद्रगढ़ अस्पताल को बने हुए लगभग 44 वर्ष का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक अस्पताल में आधुनिक मशीनें नहीं आई हैं। अस्पताल में घिसी पिटी एक्सरे मशीन हैं, जिसके कारण मरीजों को बाहर से ही एक्सरे करवाना पड़ता है। इसके अलावा सीबीसी जांच मशीन नहीं हैं तथा अल्ट्रासाउंड मशीन की भी यहां कमी हैं। इसके अलावा अन्य आधुनिक मशीनों की सुविधा भी नहीं बन पाई।
40 मरीजों पर चाहिए 1 चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार एक चिकित्सक दिन में मात्र 40 मरीजों की जांच कर सकता है। महेंद्रगढ़ अस्पताल में प्रतिदिन 700 ओपीडी आती हैं जबकि चिकित्सक मात्र सात हैं। इनमें से कभी कोई चिकित्सक छुट्टी पर चला जाता है तो कभी एवीडेंस पर चला जाता है। प्रतिदिन एक चिकित्सक को 100 से अधिक मरीज देखने पड़ते हैं जबकि राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी देखना पड़ता।
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महेंद्रगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। खासी जुखाम की दवाएं भी लोगों नहीं मिल पाती। छोटी सी बीमारी होने पर रेफर कर दिया जाता है। -सुंदरलाल आसोदिया
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उप नागरिक अस्पताल में जो सुविधाएं होनी चाहिए वो नहीं हैं। हमेशा से ही यह नगर राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। कभी किसी प्रतिनिधि ने यहां के हालात को नहीं जाना। --लक्की सीगड़ा
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उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को पूरी सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल की कमियों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। --एसएमओ-डॉ. सुरेंद्र यादव