पूरे भारत में संपूर्ण स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जिला में भी अभियान जोर शोर से चल रहा है। इसके तहत संपूर्ण जिले को स्वच्छ बनाने के लिए 31 दिसंबर तक की अवधि भी जिला प्रशासन ने निर्धारित की है। मगर यह अभियान जिला मुख्यालय नारनौल में ही दम तोड़ता नजर आ रहा है। नारनौल शहर में बने सार्वजनिक शौचालयों की हालत बहुत ही खस्ता हो चुकी है। इसकी सफाई व रख-रखाव की ओर कोई ध्यान नहीं देने से लोगों ने इनमें शौच करना भी बंद कर दिया है।
लोगों को खुले में शौच जाने की मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गांवों व शहरों में अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान के तहत 31 दिसंबर तक जिला को खुले में शौच जाने से मुक्त बनाना है। इस अभियान का गांवों में फिर भी असर दिखाई दे रहा है, मगर शहर में इस अभियान पर पूर्ण रूप से ब्रेक लगा हुआ है। शहर में बने सामुदायिक टायलेट रखरखाव के अभाव में खराब हो गए हैं। वहीं शौच आदि के लिए लोग अभी भी खुले में जा रहे हैं। शौचालयों की हालत ठीक नहीं होने के कारण मजबूरी में लोग लघु शंका आदि के लिए भी यहां-वहां जगह तलाश करनी पड़ रही है।
शहर के सभी शौचालय टूटे
नगर परिषद की ओर से शहर के अंदर अनेक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इनमें लघु शंका आदि के लिए अलग से शौचालय निर्माण कराये गए हैं। वहीं अनेक मोहल्लों में सामुदायिक टायलेट का भी निर्माण कराया गया है। मगर इन टायलेटों व शौचालयों में से अधिकतर टायलेट व शौचालय टूट गए हैं।
शौचालयों में भरी पड़ी गंदगी
अनेक सार्वजनिक शौचालय ऐसे भी हैं, जिनमें गंदगी भरी पड़ी है। इन शौचालयों की दशा देखकर ऐसा लगता है कि मानों वर्षों से इनमें सफाई नहीं हुई है। जिसके कारण इन शौचालयों में शौच आदि के लोगों ने जाना भी बंद कर दिया है।
यहां बने हैं सामुदायिक टायलेट
मोहल्ला महल मिश्रवाड़ा, पुलिस लाइन के सामने, मोहल्ला वाल्मीकि व गांधी कालोनी आदि में सामुदायिक टायलेट बने हुए हैं।
यहां बने हैं शौचालय
महेंद्रगढ़ रोड पर आईटीआई के पास, एसपी आवास के पास, नगर परिषद के पास, नई मंडी, टीबी अस्पताल के पास दो जगह नप के शौचालय बने हुए हैं।
शहरों में लोग जा रहे खुले में शौच
शहरों में अभी भी लोग खुले में शौच जा रहे हैं। गांवों में इसकी रोकथाम के लिए टीमें गठित की गई हैं, मगर शहरों में कोई टीम भी नहीं बनाई गई। शहर की बात की जाए तो रविदास मंदिर के पास स्थित जोहड़, रेलवे स्टेशन के पास, मोहल्ला खड़खड़ी, पुलिस लाइन में गोशाला रोड के पास, मोहल्ला महल, सेक्टर एक के फेज टू के प्लाटों, नहर के पास, जमालपुर, मन्नू नगर, दया नगर आदि में अनेक स्थानों पर लोग अभी भी खुले में शौच जाते हैं। जिनकी निगरानी के लिए कोई टीम गठित नहीं है।
जन परिवेदना समिति की बैठक में उठ चुकी हैं मांग
जन परिवेदना समिति की बैठक में कई बार गाड़ियां लोहारों, बंजारों तथा झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए शौचालय बनाने की मांग भाजपा नेता व ग्रिवेंशी के अन्य सदस्य उठा चुके हैं। मगर इस ओर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
लोगों को शौचालय जाने के लिए बड़ी दिक्कत आती है। ऐसे में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करा उनकी देखभाल करनी चाहिए।--नंद किशोर
शहर में शौचालयों का अभाव है, बाजार में शौच आदि जाने के लिए कोई जगह नहीं है। मजबूरी में लोग खुले में शौच कर रहे हैं। -रॉकी
शहर में बने कई शौचालयों की हालत बहुत खराब है। इनके रखरखाव की ओर नप कोई ध्यान नहीं दे रही।--प्रदीप
प्रशासन केवल गांवों तक ही अभियान चला रहा है। शहर में भी इस प्रकार के अभियान चलाने की आवश्यकता है। -मनीष सैनी
संपूर्ण स्वच्छता अभियान का शहर में भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। रोज सफाई अभियान चलाया जाता है। लोगों को खुले में शौच न जाने आदि के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।--केके यादव, सचिव, नप नारनौल।
जिन शौचालयों की हालत खराब है, उनको ठीक कराया जाएगा। हो सकता है पूरे शहर के शौचालयों को सुलभ या अन्य किसी के हैंडओवर कर दिया जाए, ताकि वहां पर साफ-सफाई रखी जा सके।-आनंद मलिक, सफाई निरीक्षक, नारनौल