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मेनटास की टॉफी समझकर सल्फास को चबाते रहे 5 मासूम

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गांव झगड़ौली में पांच मासूम बच्चे सल्फास को चूर्ण की गोली समझकर चबाते रहे। दरअसल बच्चों ने जहर की गोल आकार वाली डिब्बी को मेनटॉस की गोली समझ कर इसका सेवन कर लिया। जहर की गोलियों का रंग चूर्ण वाली गोली जैसा था। इस कारण बच्चों ने गोली चबाना शुरू कर दिया। 13 वर्षीय खुशी को कड़वाहट के साथ बदबू महसूस हुई तो उसने पूरे परिवार को सूचना दी। जिसके बाद सभी पांचों बच्चों को बचाया जा सका।
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गांव झगड़ौली निवासी संदीप खेतीबाड़ी का काम करते हैं। उनका भाई दीपक भी खेती बाड़ी का काम करता है। कोरोना के चलते देश भर के स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चे दिन भर घर पर ही रहते हैं। बच्चे घर के आसपास खेलते रहते हैं। शनिवार की सुुबह करीब 9 बजे संदीप की तीन बेटियां 8 वर्षीय नेहा, 5 वर्षीय रूबी, 4 वर्षीय अक्षरा अपने चचेरे भाई 6 वर्षीय पूर्व तथा नेहा की मौसी की लड़की 13 वर्षीय खुशी के साथ खेल रहे थे। बच्चों को गली में एक सल्फास की डिब्बी मिली। जिसका आकार इसी आकार में आने वाली मेनटॉस टॉफी से मिलता जुलता था। बच्चे पहले इस आकार की टॉफी खा चुके थे। उन्हें लगा कि यह टॉफी ही हैं। बच्चों ने उसको हाथों से खोलने का प्रयास किया। डिब्बी टाइट होने के कारण उसे खोल नहीं पाए। जिसके बाद पूर्व ने इसे दांतों से खोलते हुए छह गोलियां निकाली। सभी बच्चों को एक एक गोली बांटी। सभी बच्चे इसे चूर्ण वाली टॉफी समझ कर चूसने लगे। दो बच्चों ने इसे काटते हुए खाने का प्रयास किया। जब उन्हें गोली में कड़वाहट महसूस हुई तो थूक दिया। खुशी को गोली से कड़वाहट के साथ बदबू भी महसूस हुुई। उसने अपने मौसा संदीप को इसकी जानकारी दी। संदीप ने तुरंत गोलियों को देखा। उन्होंने तुरंत सभी बच्चों से गोली थूकने को कहा। इसके बाद आनन-फानन में सभी बच्चों को लेकर महेंद्रगढ़ नागरिक अस्पताल पहुंचाया। नागरिक अस्पताल में पहुंचने पर मेडिकल ऑफिसर डॉ. नवीन अग्रवाल ने बच्चों को उपचार देना शुरू किया। बाल रोग विशेषज्ञ को बुलाकर सभी बच्चों के पेट साफ कराए गए। डॉ. नवीन अग्रवाल ने कहा कि सल्फास की गोली का असर कुछ घंटे बाद भी हो सकता है। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों के सैंपल लिए गए हैं।जिन्हें टेस्ट के लिए भेज रहे हैं। सभी बच्चों को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया है।
सभी बच्चे सुरक्षित....
सभी पांचों बच्चों को रोहतक पीजीआई में भर्ती कर लिया गया है। तीन बेटियों के पिता संदीप ने बताया कि बच्चों के ब्लड टेस्ट सहित कई अन्य टेस्ट किए गए हैं। सभी को आईसीयू में रखा गया है। सभी की जान खतरे से बाहर है। चिकित्सक 24 से 48 घंटे तक बच्चों को अपनी निगरानी में रखेंगे।
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