नगर पालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने डीसी जगदीश शर्मा तथा शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर की है। शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत अब 31 जनवरी को मामले की सुनवाई करेगी।
नगर पालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने अगस्त 2019 में नपा की लगातार चार मीटिंग में पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी, विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019, 9 जनवरी 2019 की बैठक में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटारा कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। पार्षदों के निलंबन, सदस्यता रद्द करने के बारे में शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक के पास शक्तियां हैं। हाईकोर्ट ने 12 सप्ताह में इस पर फैसला लेने के आदेश दिए थे। निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। डीसी ने इस मामले में 24 नवंबर, दो दिसंबर, 9 दिसंबर व 13 जनवरी को सुुनवाई की है। इस मामले में डीसी कोर्ट में अगली तारीख 27 जनवरी 2020 है।
रीना गर्ग ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में शुक्रवार को याचिका दायर की। उसमें कहा कि 12 सप्ताह के तय समय में शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण, उपायुक्त जगदीश शर्मा ने फैसला न लेकर अदालत की अवमानना की है। हाईकोर्ट में सीओसीपी 243 के तहत सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में अगली तारीख 31 जनवरी तय कर दी है।