महेंद्रगढ़। दशकों से चली आ रही होली पर बाड़ लगाने की परंपरा को आज भी क्षेत्र के युवा निभा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही होली का दहन कर सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया जाता है।
सतनाली व महेंद्रगढ़ क्षेत्र की ग्रामीण इलाकों में होली का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में युवा वर्ग रात के समय कंटीली झाड़ियों, ईंधन व फसली अवशेषों से होली तैयार करते हैं। जिले के अधिकांश गांवों में होलिका पर रात के समय युवा बाड़ लगाने का काम करते हैं। होलिका से पूर्व की रात युवा सीढ़ी का प्रयोग कर होलिका की ऊंचाई बढ़ाने का काम करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी होलिका पर्व एकता एवं भाईचारे के प्रमुख पर्व के रूप में माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय युवाओं की टोलियां होली पर बाड़ लगाने के लिए एकत्रित होती है। गांव में युवा झाड़ियों की बाड़, ईंधन, फसली अवशेष उठाकर होली पर लगाते हैं। प्राचीन समय से परंपरा चली आ रही है कि जो युवा विवाह योग्य हो जाते हैं वही होलिका पर बाड़ लगाने का काम करते हैं। युवाओं का उत्साह इतना अधिक होता है कि यह सबसे ऊंची होली बनाने के लिए रातभर बाड़ लगाने का काम करते हैं।
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- शहरी क्षेत्र में कई स्थानों पर होलिका दहन आज
महेंद्रगढ़ शहर में करीब 40 स्थानों पर होली का पूजन किया जाएगा। रात में होलिका दहन किया जाएगा। शहर के रामबिहार कॉलोनी, अनाज मंडी, गोशाला रोड, मसानी चौक, भगवान परशुराम चौक, देवीलाल पार्क, मोहल्ला नीमड़ी नीचे, मोहल्ला बास, मोहल्ला सुनारों, मोहल्ला नया खटीकान, मोहल्ला वाल्मीकि, मोहल्ला महायचान, मोहल्ला सैनीपुरा, आदर्श काॅलोनी सहित विभिन्न स्थानों पर होलिका का दहन किया जाएगा।