नारनौल। कुल्ताजपुर रोड इलाके की गीता एक उभरती तीरंदाज हैं। गीता ने तीन साल में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी लेवल के दो और स्टेट लेवल का एक मेडल अपने नाम कर लिए हैं। अपने कोच विनय कुमार को ही अपना रोल मॉडल मानने वाली गीता अब देश के लिए मेडल जीतने का सपना साकार करने की तैयारी में जुटी हैं।
गीता का जन्म 29 नवंबर 2003 को एक साधारण से परिवार में हुआ था। गीता के साथ पढ़ती दिव्या व पलक तीरंदाजी का अभ्यास करती हैं। उन्हीं की देखादेखी गीता ने भी तीरंदाजी सीखने का मन बना लिया। जनवरी 2023 में 18 साल की उम्र में मैदान में उतरी गीता अब तक तीन पदक अपने नाम कर चुकी हैं। दिसंबर 2023 में पटियाला ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी लेवल पर गोल्ड मेडल जीता। नवंबर 2024 गुरुग्राम में स्टेट लेवल सिल्वर पर निशाना लगाया। दिसंबर 2024 में ओडिशा में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में कांस्य जीत सकीं।
इसी साल पश्चिम बंगाल में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के ट्रायल में गीता का चयन नहीं हो पाया। इसका मलाल अभी तक दिल से मिटा नहीं है। गीता का कहना है कि उन दिनों घर की उथल-पुथल के चलते वह ठीक से तैयारी नही कर सकीं। अगले कदम के बारे में कहती हैं कि वह तीरंदाजी में देश के गोल्ड जीतना चाहती हैं। साथ ही कोच बन नई प्रतिभाओं को ढूंढ उन्हें तैयार करना भी उनका सपना है।
गीता एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। इस साल के नेशनल में पारिवारिक हालात के चलते सिलेक्ट नहीं हो पाईं। अब लगातार 5-6 घंटे अभ्यास कर रही हैं। गीता का निशाना भी एकदम सटीक है। ऐसे ही अभ्यास करती रही तो एक दिन जरूर देश को मेडल दिलाएंगी।
- विनय कुमार, आर्चरी कोच, सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, नारनौल