नारनौल। परीक्षा का नाम सुनते ही अधिकांश विद्यार्थियों के मन में डर, घबराहट और तनाव उत्पन्न हो जाता है जो सीधे तौर पर उनके प्रदर्शन को प्रभावित करता है। इसी विषय पर डायट द्वारा उम्मीद काउंसिलिंग सेंटर के माध्यम से छात्रों को परीक्षा के लिए बगैर तनाव व मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है।
प्रभारी एवं डिस्ट्रिक्ट काउंसलर सूर्यकांत यादव ने बताया कि परीक्षा को भय के रूप में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ लेना ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।
उन्होंने बताया कि परीक्षा तनाव कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक सामान्य मानसिक स्थिति है जिसे सही मार्गदर्शन और मनोवैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
डर की स्थिति में मस्तिष्क अपनी पूरी क्षमता से कार्य नहीं कर पाता जबकि शांत और संतुलित मन से विद्यार्थी बेहतर निर्णय ले सकता है और अपनी तैयारी का सही उपयोग कर पाता है।
सूर्यकांत यादव ने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक दबाव, बच्चों की आपसी तुलना और अत्यधिक अपेक्षाएं विद्यार्थियों में भय और तनाव को बढ़ाती हैं। इसके विपरीत यदि उन्हें यह समझाया जाए कि परीक्षा जीवन का एक चरण है, अंतिम पड़ाव नहीं तो उनका आत्मविश्वास स्वतः बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
उन्होंने बताया कि वे काउंसिलिंग के दौरान विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, गहरी सांस लेने के अभ्यास (ब्रिदिंग एक्सरसाइज) और सकारात्मक आत्मसंवाद (पॉजिटिव सेल्फ टॉक) जैसे सुझाव देकर परीक्षा तनाव को कम करने का अभ्यास करवाते हैं।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही, परीक्षा से पहले अपने डर और शंकाओं को किसी भरोसेमंद शिक्षक या काउंसलर से साझा करना भी मानसिक राहत देता है।
वर्जन
बिना डर की परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपनी क्षमताओं का सर्वोत्तम प्रदर्शन करना है। विद्यार्थी परीक्षा को चुनौती की बजाय अवसर के रूप में देखें तो न केवल परिणाम बेहतर होंगे बल्कि उनका समग्र व्यक्तित्व भी मजबूत होगा।
-बिश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।