नांगल चौधरी। गांव गोलवा में सांस्कृतिक अहीरवाल के इतिहास लेखन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री मुख्य अतिथि मौजूद रहे। सत्यव्रत शास्त्री का ग्रामीणों ने फूल मालाओं से स्वागत किया।
सत्यव्रत शास्त्री ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र ऋषि मुनियों की तपस्थली रहा है। महर्षि धौम्य, ऋषि च्वन, ऋषि उदालक के साथ-साथ कण्व ऋषि का भी इस अहीरवाल में समय-समय पर आगमन होता था। उन्होंने बताया कि गोलवा गांव की सीमा में स्थित कण्वाश्रम इस बात की गवाही देता है जिसे आज भी लोग बारहकी बोलते है। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि महर्षि कण्व के बारह आश्रम थे उनमें से एक गोलवा गांव की सीमा में था। यह बहुत प्राचीन स्थल है और अपने वैभव को प्रदर्शित करता है। सत्यव्रत शास्त्री ने गांव के बहुत पुराने तालाब, नरसिंह दास मंदिर, बाबा गोवर्धन दास मंदिर और 12 की स्थित भगवान दत्तात्रेय, बालाजी और पहाड़ी बाबा के मंदिरों में जाकर उनके दर्शन कर वहां वर्तमान में रह रहे साधु-संतों से स्थान के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि मंदिर के नजदीक एक गुफा देखने को मिली, जिस पर शोध करने से कुछ ऐतिहासिक जानकारियां मिल सकती हैं। इस अवसर पर इतिहास लेखन के लिए गांव के प्रबुद्ध बुजुर्गों व नौजवानों की एक टीम का गठन किया गया। इस अवसर पर ग्रामीण इंद्राज पंच, माडूराम, लालचंद प्रजापत, भजनी पंच, बजरंग प्रजापत, महावीर पंच, रमेश,राकेश, सतीश, हरीश, दीपक संदीप, सुनील पुजारी, सुनील शर्मा,तथा ख्यालीराम उपस्थित रहे ।