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Mahendragarh-Narnaul News: देवउठनी एकादशी के बाद 22 से शुरू हो रहे हैं शादी के शुभ मुहूर्त

Mon, 27 Oct 2025 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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महेंद्रगढ़। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जाग जाएंगे। इस दिन अबूझ सावा मुहूर्त में शादी के अलावा कोई भी मांगलिक कार्य हो सकता है। इसके बाद 22, 23, 25, 27, 29 और 30 नवंबर को शादी का शुभ मुहूर्त है।
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ज्योतिषाचार्य पं. राहुल भारद्वाज ने बताया कि दाे नवंबर को देवउठनी एकादशी रहेगी। देवउठनी को अबूझ सावा मुहूर्त रहेगा। इस दिन बिना कोई मुहूर्त का विचार किए विवाह या कोई शुभ कार्य कर सकते हैं। इस दिन से शादी-विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि सभी मांगलिक शुभ कार्य फिर शुरू हो जाएंगे। इस एकादशी को प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
देवउठनी एकादसी को तुलसी विवाह का बहुत महत्व है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का माता तुलसी के साथ विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह संपन्न कराने से कन्यादान के समान फल की प्राप्ति होती है और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।
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साथ ही तुलसी जी और शालिग्राम की कृपा से विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं। शादीशुदा जीवन में भी खुशियां बनी रहती हैं। जिस किसी के कन्या न हो तो उसे तो तुलसी विवाह करके कन्या दान का पुण्य जरूर कमाना चाहिए।
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ये रहेंगे विवाह के शुभ मुहूर्त
विवाह में शुभ मुहूर्त देखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुभ मुहूर्त में किया गया विवाह अखंड होता है और वैवाहिक जीवन हमेशा सुख, समृद्धि, संपन्नता और प्रेम से भरा रहता है और वैवाहिक जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आती। पंचांग अनुसार शुभ मुहूर्त में ही विवाह करना चाहिए।नवंबर में देवउठनी एकादशी, 22, 23, 25, 27, 29, 30 नवंबर और 5 दिसंबर को शादी का मुहूर्त है। 16 दिसंबर से 14 जनवरी मकर संक्रांति तक मलमास रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों, विवाह शादियों पर विराम रहेगा। इस समय के दौरान कुछ अबूझ सावा रहेंगे। 23 जनवरी को वसंत पंचमी और 19 फरवरी को फुलेरा दूज है।
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8 दिसंबर को शुक्र होगा अस्त
आठ दिसंबर को शुक्र अस्त हो जाएगा। शुक्र अस्त का मतलब है कि शुक्र ग्रह सूर्य के बहुत करीब होने के कारण इसका प्रभाव कम हो जाता है। ज्योतिष के अनुसार जब शुक्र अस्त होता है, तो विवाह और अन्य शुभ व मांगलिक कार्यों को रोक दिया जाता है, क्योंकि यह सुख-समृद्धि और भौतिक सुखों के कारक ग्रह के प्रभाव में कमी को दर्शाता है। इसलिए विवाह शादियों के कार्यक्रम फिर से रुक जाएंगे। इसके बाद शुक्र चार फरवरी 2026 को उदय होंगे। तब से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।
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