नारनौल। अवैध स्टोन क्रेशर मामले में जिला प्रशासन द्वारा मुकंदपुरा गांव के एक बड़े आबादी वाले हिस्से को कागजों में अवैध घोषित करने की बात सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता व पर्यावरणविद इंजीनियर तेजपाल यादव के अनुसार मुकंदपुरा गांव राजस्व रिकॉर्ड अनुसार तीन अलग-अलग रजिस्टर्ड आबादियों में बसा हुआ है। इसमें एक को स्थानीय लोगों द्वारा मुकंदपुरा, दूसरी आबादी को ढाणी चिरागपुरा, तीसरी आबादी को ढाणी झगड़ेत बोला जाता है। जबकि राजस्व रिकार्ड अनुसार यह पूरा का पूरा क्षेत्र मुकंदपुरा गांव ही है व मुकंदपुरा के इन तीनों आबादी क्षेत्रों में रजिस्टर्ड फिरनी भी है।
यादव ने बताया कि एनजीटी के 3 दिसंबर 2020 के आदेश की अनुपालना में कार्रवाई करते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जिले के लगभग 50 स्टोन क्रेशरों के लाइसेंस एनओसी को रद्द कर दिया था। इनमें से गांव खातोली अहीर में स्थित कई स्टोन क्रेशरों को बचाने के लिए प्रशासन एक झूठी, भ्रामक, तथ्यों को गुमराह करने वाली, फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
गौरतलब है कि इंजीनियर तेजपाल यादव लंबे समय से प्रदूषण व स्टोन क्रेशरों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके एनजीटी में चल रहे मुकदमे के तहत 24 जुलाई 2019 को एनजीटी ने महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रेशरों को बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन अगस्त 2019 में क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए व कोरोना के चलते काफी लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाइयां स्थगित रही। 2 नवंबर 2020 को उनके वकील प्रशांत भूषण की पैरवी के चलते यह मामला सुप्रीम कोर्ट से वापिस एनजीटी को स्थानांतरित हो गया था। एनजीटी ने 3 दिसंबर 2020 को 24 जुलाई 2019 के महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रेशरों को बंद करने के अपने पुराने आदेश को ही अमल में लाने के आदेश दिए थे।
- क्रशर संचालकों ने पर्यावरण विभाग में की अपील
गांव खातौली अहीर में स्थित स्टोन क्रेशर के संचालकों ने अपनी सीओटी एनओसी को पुन: बहाल करने हेतु हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के फैसले के खिलाफ हरियाणा पर्यावरण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जोकि प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा जारी फैसलों पर प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास पहुंचे थे। उन्होंने अपील में हवाला दिया कि मुकंदपुरा गांव के बड़े हिस्से की पूरी आबादी ढाणी चिरागपुरा केंद्र सरकार की भूमि/अरावली पर्वत क्षेत्र में बसी हुई है। जिस पर अधिकारी ने उपायुक्त नारनौल को इस मामले में वस्तु स्थिति को देखकर संज्ञान लेकर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। जिस पर अब वर्तमान में पटवारी, तहसीलदार नारनौल व जिला प्रशासन इस रजिस्टर्ड आबादी क्षेत्र को गलत व अवैध साबित करने में लगा हुआ है।
- मुकंदपुरा के आबादी क्षेत्रों में है रजिस्टर्ड फिरनी
तेजपाल यादव ने कहा कि मुकंदपुरा गांव राजस्व रिकॉर्ड अनुसार तीन अलग-अलग रजिस्टर्ड आबादियों में बसा हुआ है। जबकि राजस्व रिकार्ड अनुसार यह पूरा क्षेत्र मुकंदपुरा गांव ही है व गांव के तीनों आबादी क्षेत्रों में रजिस्टर्ड फिरनी भी है। ढाणी चिरागपुरा की फिरनी नंबर 185 जोकि जमाबंदी रिकॉर्ड अनुसार रजिस्टर्ड फिरनी है। 2019 में तत्कालीन डीसी जगदीश शर्मा की अध्यक्षता में खातोली अहीर में स्थित अधिकांश स्टोन क्रशर की दूरी मापने के दौरान इन्हें हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के किसी भी नजदीकी फिरनी के साथ लगती आबादी से निर्धारित 1 किलोमीटर की आवश्यक दूरी से कम होने पर इन्हें अवैध पाया गया था। इनकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में इसे रजिस्टर्ड फिरनी, रजिस्टर्ड आबादी क्षेत्र एवं मुकंदपुरा गांव का ही एक हिस्सा मानती है तो वर्तमान में जिला प्रशासन इस पूरे रजिस्टर्ड आबादी क्षेत्र/ढाणी चिरागपुरा को ही अवैध व सरकारी भूमि/पर्वत की जमीन पर बता रहा है।
- वर्जन-
मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। दस्तावेज देखकर ही कुछ बताया जा सकता है। दस्तावेज में जो होगा उसके तहत ही कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार, एसडीएम नारनौल