जीवन बीमा पॉलिसी की परिपक्व राशि दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से 75 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में गांव कादीपुरी (फैजलीपुर) निवासी हरपाल सिंह ने बताया कि दिसंबर 2021 में उसके मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आई। फोन करने वाली महिला ने अपना परिचय आईजीएमएस विभाग हैदराबाद में तैनात अधिकारी तैनात रूपल चंद्रा के रूप में देते हुए एचडीएफसी बैंक में की गई बीमा पॉलिसी के बारे में जानकारी दी। रूपल ने कहा कि उसकी मेच्योरिटी राशि 8 लाख रुपये दी जानी है। उक्त पॉलिसी पर 8729 रुपये टैक्स बकाया है। अगर वह टैक्स जमा कर दे तो वह राशि उसे मिल जाएगी। पॉलिसी के बारे में जानकारी देने के बाद उसने महिला पर विश्वास कर लिया और उसके द्वारा दिए गए बैंक खाते में 8729 रुपये एक साइबर कैफे के माध्यम जमा करवा दिए। जिसकी पेमेंट रसीद भी उसके व्हाट्सअप नंबर पर भेज दी गई। इसके बाद रूपल ने उससे कहा कि कुछ लोगों की बीमा पॉलिसियों की फाइलें उसके कार्यालय में हैं। उनका टैक्स बकाया है। बीमाधारक टैक्स भरने में असमर्थ हैं। अगर वह उन पॉलिसियों के टैक्स भर दे तो उनका कुछ पैसा उसे मिल जाएगा। मगर उसने ऐसा करने से मना कर दिया।
हरपाल ने कहा कि रूपल के बार-बार फोन करने पर उसने रूपल के दिए गए बैंक खातोें में 30 लाख 76 हजार 522 रुपये दिसंबर और जनवरी में जमा करवा दिए। इसके बाद रूपल ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर लिया। इसके कुछ दिन बाद अजय अग्रवाल नामक व्यक्ति ने फोन कर खुद को ईडी विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि आईजीएमएस हैदरबाद से उसकी इंश्योरेंस की फाइलें उसके पास आई हैं। जिनको हैदराबाद में रूपल चंद्रा डील कर रही थीं। रूपल चंद्रा की शिकायत होने पर विभाग ने यह फाइलें उसके पास मुंबई भेजी हैं। क्योंकि रूपल ने उससे पैसा ऐंठ लिया था। इस पर उसने अजय पर विश्वास कर लिया और उसके पैसे वापस दिलाने की गुहार लगाई। उसने कहा कि पैसे वापस मिल जाएंगे। यदि वह 1 लाख रुपये टैक्स का भुगतान कर दे तो उसे दूसरे लोगों की पॉलिसियों के 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये मिल जाएंगे। उसने पैसे देने से मना कर दिया।
हरपाल ने कहा कि वह अजय पर अधिकारी होने का विश्वास कर उसने उसके बताए गए खाते में 75 हजार 396 रुपये का भुगतान कर दिया। इस पर अजय ने कहा कि 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये बहुत बड़ी राशि है, इसलिए उसे अपने बैंक अकाउंट को सर्विवल अकाउंट में बदलना होगा, जिसका खर्चा 5 लाख 40 हजार रुपये है। उसने अजय द्वारा बताए गए खाते में राशि जमा कर दी। इसके बाद अजय ने उससे 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये पर लगने वाला टैक्स भरने के लिए कहा। उसने वह भी जमा कर दिया। इस दौरान अजय ने फोन कांफ्रेंस के जरिये मनीष मिश्रा से बात करवाई। उसने खुद को वित्त मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली का अधिकारी बताते हुए मिलने वाले छह करोड़ पर 2 प्रतिशत केंद्रीय टैक्स जमा करने के लिए कहा। उसने 15 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद अजय ने कहा कि उक्त राशि के भुगतान पर एजेंट द्वारा रोक लगवा दी गई है। जिसको हटवाने के लिए 13 लाख 50 हजार का खर्च आएगा। हरपाल ने बताया कि इस तरह रूपल चंद्रा, अजय अग्रवाल, मनीष मिश्रा और सुरभि अग्रवाल ने खुद को अधिकारी बताकर उससे 75 लाख 57 हजार 690 रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।