अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। सरसों की बंपर पैदावार किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। हैफेड किसानों से प्रति एकड़ के हिसाब से 8 क्विंटल तक ही सरसों खरीद रही है। किसानों को प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक सरसों की पैदावार हुई है। ऐसे में किसानों को एक तिहाई सरसों बिक नहीं पा रही। किसानों का सरकार के प्रति गुस्सा है। दूसरी बार सरसों लाने के लिए दोबारा से किराया भाड़ा खर्च करना पड़ेगा।
इस बार मौसम ठीक रहा तो किसानों को सरसों की अच्छी पैदावार मिली। फरवरी-मार्च में हल्की बरसात हुई, जिससे तापमान में गिरावट रही। ऐसे में सरसों की पकावट अच्छी हुई। किसानों को औसतन 12 से 15 क्विंटल का उत्पादन हुआ। प्रदेश सरकार ने सरसों खरीद के लिए आठ क्विंटल प्रति एकड़ का नियम बनाया हुआ है। इससे अधिक उत्पादन पर सरसों की खरीद नहीं की जा रही। अगर किसान एक एकड़ की पूरी फसल मंडी ला रहा है तो उसे एक तिहाई सरसों वापस ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही अगर किसी किसान ने तीन एकड़ से अधिक सरसों की बिजाई कर रखी है तो वह भी मुसीबत में है। एक दिन में 25 क्विंटल सरसों नहीं बेच सकता। ऐसे में किसानों की आधी अधूरी सरसों की बिक पा रही है। किसानों को बची हुई सरसों या तो मंडी में सस्ते भाव पर बेचनी पड़ेगी या फिर उसे दोबारा मंडी लाना होगा। दूसरी बार का शेड्यूल कब आएगा इसकी जानकारी भी नहीं है। ऐसे में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
यह बोले किसान
अभी तो आधी सरसों ही बिक पाएगी। वीरवार को सुबह सरसों लेकर आया था। अधिकारी तरह तरह के कानून बता रहे हैं। कभी 25 क्विंटल की बात कहतें तो कभी नमी ज्यादा बता देते हैं। दूसरों की सरसों की 10 प्रतिशत नमी पर भी खरीद रहे हैं। हमारी खरीद नहीं कर रहे।
- राकेश, जेरपुर।
हम 11 अप्रैल की सुबह सात बजे से बैठे हुए हैं। अधिकारियों ने कोई शेड्यूल तैयार नहीं किया। अधिकारियों को शेड्यूल दो पहले देना चाहिए था। एक दिन पहले अखबारों के जरिए शेड्यूल बताते है। किसान आनन-फानन में सरसों कैसे लाएं। पूरी सरसों भी नहीं खरीद रहे।
- बृजभान, जेरपुर।
सरसों बेचने के लिए बैठे हुए हैं। रात को मच्छर काटते रहते है। अधिकारी सरसों चैक करके नमी अधिक बताकर चले गए। जिसके कारण परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। हम तो पूरी सरसों ले आए। अब अधिकारी बता रहे हैं कि आठ क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ही खरीदेंगे
- सुखबीर, जेरपुर।
वीरवार से ट्राली के पास ही खुले में हैं। दिन में तेज धूप में तपते हैं। रात को मच्छरों से जंग होती है। अधिकारी अधिक नमी बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते है। सरसों खरीद हमारे लिए मुुसीबत बन गया है। सरकार की ओर से अच्छी व्यवस्था नहीं की गई।
- बहादुर सिंह, जेरपुर।
वर्जन
सरसों खरीद के मानक सरकार ने तय किए हैं। हम मानकों के अनुसार ही खरीद कर रहे हैं। आठ क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ही खरीद की जा रही है। एक किसान एक दिन में 25 क्विंटल सरसों बेच सकता है। दूसरे फेज में गांवों के नाम दोबारा से आएंगे।
- जगराम, हैफेड मैनेजर, महेंद्रगढ़।