नारनौल। बाजरे की खरीद शुरू हुए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन गुणवत्ता खराब होने के कारण अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। अब तक नारनौल में 1500, नांगल चौधरी में 293.5 और अटेली में 2100 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है।
गुणवत्ता खराब होने के कारण खरीद एजेंसियों ने बाजरा खरीदने से इंकार कर दिया। इस कारण बाजरा लेकर मंडी पहुंचे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने बाजरे की जांच की मांग की, जिसके बाद बाजरे के सैंपल को रेवाड़ी स्थित लैब में भेजा गया। जहां किसी भी किसान के बाजरे की गुणवत्ता तय मानक पर खरी नहीं उतरी और खरीद एजेंसियों ने बाजरे की खरीद नहीं की।
बाजरे की खरीद भावांतर के तहत की जा रही है, जिसके लिए सरकार ने बाजरे का बाजार भाव 2150 रुपये तय किया था लेकिन बाजरे के भाव में स्थिरता बनी रहे इसके लिए भावांतर के तहत खरीद में बाजरे के बाजार भाव में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं सरकारी खरीद में बाजरे के लिए मना होने के बाद अनेक किसान व्यापारियों को बाजरा बेच रहे हैं।
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गुणवत्ता खराब बताकर नहीं खरीदा गया। यदि व्यापारी सरकार की तरफ से तय बाजार भाव पर बाजरा नहीं खरीदते हैं तो भावांतर के तहत मिलने वाली राशि नहीं मिल पाएगी। -हरीश कुमार, किसान, गांव-मंढाना
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तीन दिनों में 200 क्विंटल बाजरा खरीदा है लेकिन जे फार्म जारी नहीं होने के कारण किसान को भुगतान नहीं किया जा सका है। इस कारण किसान व व्यापारी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।-हरिराम, व्यापारी, नई अनाज मंडी
वर्जन :
जिले की चार मंडियों में बाजरे की खरीद की जा रही है लेकिन अब तक जितने भी बाजरे की आवक हुई है, वह गुणवत्ता के मानक पर खरा नहीं है। इसलिए बाजरे की खरीद नहीं की गई है। बाजरे के बाजार भाव में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल।