अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। प्रदेश सरकार एक ओर जहां गांव स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों निर्माण कर वाहवाही लूट रही है। वहीं दूसरी ओर शहर के तीन मंजिला नागरिक अस्पताल की जर्जर इमारत की मरम्मत नहीं हो पा रही है। नारनौल नागरिक अस्पताल की इमारत काफी पुरानी होने के कारण इसमें कई जगह दरारें आ गई हैं, वहीं इमारत की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिरने लगा है। प्लास्टर के अलावा कई जगह पर लेंटर भी गिरना शुरू हो गया है। जबकि पुरानी इमारत में अभी भी मरीजों का देखा जाता है। वहीं पुरानी इमारत के एक हिस्से में प्रशासनिक भवन भी है। जहां की हालात इस इमारत से भी दयनीय है। इस भवन में रोज प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे विभाग के कर्मचारी व अधिकारी भी सहमे हुए हैं।
नारनौल में 25 नवंबर 1970 को 100 बैड के अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद से यहां पर मरीजों को देखा जाने लगा। परंतु 2005-06 में आई बाढ़ के बाद इस पुरानी बिल्डिंग को कंडम घोषित करते हुए इसमें मरीजों को देखना व अन्य कार्य बंद कर साथ लगती दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए थे, परंतु दो माह बाद फिर से यहां पर काम होने लग गए। अब हालात यह है कि इस इमारत की छत का प्लास्टर व लेंटर कई बार गिर चुका है। वहीं कई जगह गिरने की कगार पर है। इसके साथ ही इमारत की दीवारों में दरारें आई हुई हैं तथा कई जगह से अंडरग्राउंड लाइनों से पानी टपकता रहता है। इसके बावजूद यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य विभागों का काम होता है। इसके अलावा जच्चा-बच्चा वार्ड भी इसी पुरानी इमारत में स्थित है। जहां दिन-रात मरीजों को आना-जाना लगा रहता है। जबकि अन्य मरीज का भी दिन के समय अस्पताल में जमावड़ा लगा रहता है। हालांकि नागरिक अस्पताल परिसर उत्तर दिशा की ओर तीन मंजिलें नए भवन निर्माण किया गया। इस नए भवन के ग्राउंड फ्लोर पर आपातकालीन सेवाएं चल रही हैं। जबकि प्रथम तल पर मरीजों के वार्ड बनाए गए हैं। जहां मरीजों के भर्ती करने की सुविधा की गई है। इसके अलावा तीसरे तल पर जिला कार्यक्रम अधिकारी का कार्यालय स्थापित किया गया। जबकि आधी इमारत बंद पड़ी है।
- कौन-कौन से विभाग हैं इस इमारत में
इस पुरानी इमारत में फिलहाल टीका विभाग, मरहम पट्टी कक्ष, ब्लड व यूरेन सैंपल कक्ष, दंत विभाग, अल्ट्रासाउंड केंद्र, ब्लड बैंक, एक्स-रे, मैटरन विभाग अभी चल रहे हैं। इसके साथ ही चिकित्सक भी इसी इमारत में बैठकर मरीजों की जांच करते है।
- दूसरी इमारत का भी है यही हाल
वहीं सिविल अस्पताल के पूर्व की ओर मुख्य द्वार के पास बने प्रशासनिक भवन की इमारत का भी यही हाल है। इस इमारत का निर्माण 1967 में हुआ था। सही रखरखाव नहीं होने के कारण यह इमारत भी धीरे-धीरे जर्जर होनी शुरू हो गई। जर्जर होने के साथ प्रशासनिक भवन की छत व प्लास्टर भी गिरने लगे हैं।
- कई विभाग के कार्यालय चल रहे यहां
इस इमारत में कैश ब्रांच, डीआईओ ब्रांच, फैमिली प्लानिंग विभाग, जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग के कार्यालय के अलावा पुलिस चौकी भी इसी बिल्डिंग में बनाई गई है। जहां भी अस्पताल के कर्मियों के अलावा रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं।
- अस्पताल में कई जगह छतों से प्लास्टर निकाला हुआ है। जिससे लेंटर के सरिये भी दिखाई देने लगे है। इसके अलावा इमारत की दीवारों में भी दरारें आई हुई है। इससे हादसा होने का भय है। - कमल सिंह
- नागरिक अस्पताल की इमारत काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। प्रथम तल कुछ ठीक-ठाक पर परंतु दूसरी व तीसरी मंजिल की हालात काफी दयनीय है। - अमित सिंह
- बारिश के मौसम में इमारत की छतों में पानी टपकता रहता है। वहीं शौचालय का भी बहुत बुरा हाल हो रहा है। अस्पताल की इमारत की जल्द से जल्द मरम्मत होनी चाहिए। - राजबीर सिंह
- नागरिक अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सरकार व प्रशासन को जल्द इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता है। - वेद्रप्रकाश
- अस्पताल के चारों ओर गंदगी आलम बना हुआ है। शौचालय का ओर भी बुरा हाल बना हुआ है। शौचालय को देखकर लगता है कि इनकी कभी सफाई नहीं होती है। - सुनील कुमार
नागरिक अस्पताल की पुरानी इमारत की मरम्मत के लिए 25 लाख रुपये का बजट आया हुआ है। इमारत की देखरेख का कार्य लोक निर्माण विभाग करता है। हालांकि उन्होंने ने अपने स्तर पर भी विभाग को कहा है। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने जर्जर इमारत का निरीक्षण किया था। मरम्मत का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। - दयानंद बागड़ी, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, नारनौल।