20 लाख रुपये प्रति माह खर्च, फिर भी लगे गंदगी के ढेर
सामाजिक संगठनों, स्कूलों, नेताओं आदि ने स्वच्छता अभियान फोटो खिंचवाने तक सीमित
फोटो संख्या : 35 से 40
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लग रहा है। मिशन को तीन वर्ष पूरे होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास का महेंद्रगढ़ के हरियाणा में सफाई के मामले में न.1 होने का सपना भी अधूरा रह गया है। सोमवार को गांधी जयंती और स्वच्छ भारत मिशन के तीन साल पूरे होने पर शहर के सामाजिक संगठनों, स्कूलों, नेताओं आदि ने स्वच्छता अभियान चलाया, लेकिन उनका स्वच्छता अभियान केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहा। धरातल पर उनके द्वारा की गई साफ सफाई नजर नहीं आई बल्कि शहर गंदगी के ढेर पर ही रहा।
हालात यह है कि तीन वर्ष पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने झाडू उठाकर जिस सब्जी मंडी में सफाई अभियान की शुरुआत की थी, वहां गंदगी के ढेर लगे हुए हैं और लावारिस पशु वहां विचरण करते रहते हैं। सुबह लगभग 10 बजे अमर उजाला टीम ने मोहल्ला सैनीपुुरा, 11 हट्टा बाजार, रेलवे रोड़, सब्जीमंडी, अनाज मंडी आदि विभिन्न स्थानों का दौरा किया जहां पर गंदगी के ढेर लगे हुए थे। पालिका प्रशासन के कर्मचारी विभिन्न स्थानों पर कूड़े उठाने में लगे हुए थे उसके बाद भी कई स्थानों पर गंदगी दिखाई पड़ रही थी और शौचालयों की भी सफाई नहीं हो रखी थी।
20 लाख रुपये प्रति माह खर्च, फिर भी नहीं सफाई
नगरपालिका शहर की सफाई पर 20 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च करती है उसके बाद भी शहर की सफाई दुुरुस्त नहीं हो पाती है। शहर की सफाई के लिए 100 सफाई कर्मचारी, पांच टैंपो, ट्रैक्टर ट्राली और ऊंट गाड़ी लगाई हुई है। जुलाई माह में नगरपालिका में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने इच्छा जाहिर की थी उसका शहर स्वतंत्रता दिवस से पहले स्वच्छ और सुंदर हो। उसके बाद पालिका ने अपने प्रयास तो किए किंतु वो पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सके।
वार्डों में नहीं कूड़ेदान, लावारिस पशु विचरते हैं
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के तीन वर्ष बाद ही शहर के वार्डों में डस्टबिन नहीं रखे गए। इस कारण वार्डवासी विभिन्न स्थानों पर अपना कूड़ा डाल देते हैं। कूड़े के ढेर होने पर पशु विचरण करने लगते हैं। इससे कूड़ा सड़कों पर बिखर जाता है और नालियों में जाकर उन्हें रोक देता है। अभी शहर में विभिन्न स्थानों पर ऑन रोड लगभग 20 डस्टबिन ही लगे हुए हैं। नपा पार्षदों की आखिरी मीटिंग में शहर के विभिन्न स्थानों पर 100 डस्टबिन रखवाने का प्रस्ताव पास किया था। अभी तक वो डस्टबिन नहीं लग पाए हैं जबकि मीटिंग को हुए तीन महीने का समय बीत गया है।
नहीं हुआ महेंद्रगढ़ खुले में शौचमुक्त
भले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश को खुुले में शौच मुक्त कर दिया हो किंतु हकीकत यह है कि आज भी गांव और शहरों में लोग बाहर शौच करने को जाते हैं। झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों के पास शौचालय नहीं होने के कारण उन्हें खुले में शौच जाना पड़ रहा है। इसके अलावा शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई नहीं होने के कारण दुकानदार और उपभोक्ताओं को शौच के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। पालिका प्रशासन ने शहर में सात शौचालय बनाए जाने और 2 मोबाइल शौचालय बनाए जाने का प्रस्ताव अपनी आखिरी मीटिंग में पास किया था उसके बाद भी शौचालय नहीं बनाए गए।
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सफाई कर्मचारी तीन चार दिन में आते हैं, तब तक कचरों का ढेर हो जाता है। लावारिस पशु उनको फैला देते हैं और नालों में डाल देते हैं। नालियों की सफाई होने के बाद उसका निकाला गया कीचड़ भी नहीं उठाया जाता बल्कि दूसरे ही दिन वह फिर नालियों में चला जाता है। पालिका प्रशासन को यहां पर एक कूड़ादान रखवाना चाहिए ताकि किसी को परेशानी न हो।
-रवि सैनी।
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खाली जगह में गंदगी का ढेर लगा हुआ है। चेयरपर्सन रीना गर्ग के पति सुरेंद्र बंटी को भी इसकी जानकारी दी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे पहले दस हजार रुपये लगाकर गंदगी उठवाई थी। अब फिर गंदगी का ढेर लग गया है। दूसरा नालियों की 15 दिन में सफाई होती है। नालियों से निकाला गया कीचड़ भी उठाया नहीं जाता।
-डॉ. सदाराम सिवाच।
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नगरपालिका ने सभी स्थानों पर सफाई करवाई है। फिर भी कहीं रह गई है तो कल करवा दी जाएगी। पालिका प्रशासन जल्द ही 100 कूड़ेदान सार्वजनिक स्थानों पर रखवाएगी। इसके लिए अलावा हर घर और दुकानदार को अपने घर के बाहर एक कूड़ादान रखना पड़ेगा। यदि किसी ने कूड़ादान नहीं रखा तो पालिका प्रशासन उस पर जुर्माना लगाएगा। इसके अलावा शहर में 16 मोबाइल टायलेट बनाए जाएंगे। कुछ जगहों पर काम भी चल रहा है।
-रीना गर्ग, नपा चेयरपर्सन महेंद्रगढ़