अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी।
जगमग योजना में शामिल गांव कालबा में बिजली कटौती पर मंगलवार को ग्रामीण आक्रोशित हो गए। आक्रोशित ग्रामीण सुबह आठ बजे गांव में एकत्रित हुए और इसके बाद नांगल चौधरी निगम कार्यालय में पहुंचे। यहां एसडीओ अनुपस्थित पाकर सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
ग्रामीणों ने बताया कि 24 घंटे बिजली सप्लाई उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बोरवेल व घरेलू फीडरों को अलग-अलग बांटा गया है। घरेलू फीडर से केवल डोमेस्टिक उपभोक्ताओं को बिजली मिलेगी। सरकार के निर्देशानुसार उपभोक्ताओं के मीटरों को पिल्लर बॉक्सों में भी लगा दिया गया है। तर्क दिया कि जहां पिल्लर बॉक्स से बिजली सप्लाई होगी, उन गांवों को 18-24 घंटे बिजली मिलेगी। इसके बाद जगमग योजना क्रियान्वित करके बकाया बिलों की रिकवरी कर ली गई। उपभोक्ताओं को झांसा दिया कि जगमग योजना के गांवों को 24 घंटे बिजली मिलेगी। निर्धारित नियमानुसार 85 प्रतिशत ग्रामीण नियमित रूप से बिजली सप्लाई कर रहे हैं। बावजूद उन्हें 24 घंटे में से पांच घंटे बिजली मिलती है। दिन में दो घंटे से अधिक बिजली नहीं मिलती। रात को बजे सप्लाई शुरू होती है, 11 बजे कट हो जाएगी। सुबह पांच बजे फिर बहाल होती है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी में बिजली न होने से उनको रातभर जागकर गुजारनी पड़ती है। अधिक समस्या पेयजल की हो गई। बार-बार कटौती के चलते सभी मोहल्लों में पानी नहीं पहुंच रहा। निगम अधिकारियों को शिकायत की तो उन्होंने जल्द ही सप्लाई बढ़ाने तथा सुचारु करने का भरोसा दिया था। लेकिन सोमवार को दुबारा पूरी रात बिजली गुल रही। इससे आक्रोशित ग्रामीणों की सुबह आठ बजे बैठक हुई। इसके बाद एसडीओ को ज्ञापन सौंपने नांगल चौधरी पहुंच गए। यहां एसडीओ हाजिरी नहीं मिला, जिस पर ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने कार्यालय के सामने खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
शेड्यूल के अनुसार मिल रही बिजली
पावर हाउस के कनिष्ठ अभियंता बजरंगलाल ने बताया कि सभी फीडरों को शेड्यूल के अनुसार बिजली मिल रही है। ब्रेक डाउन होने पर मजबूर सप्लाई बंद करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि शेड्यूल उच्चाधिकारी ही निर्धारित करते हैं जिसकी पालना करना अनिवार्य है।