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नोट : 5 नहीं चार ट्रेनें ही हुईं हैं निरस्त सुधार

फोटो संख्या : 41 से 50
रेलवे पटरी के ऊपर से निकाल रहा था कंटेनर, ट्रेन ने मारी टक्कर
8 घंटे रूट बाधित, 4 पैसेंजर ट्रेनें निरस्त करनी पड़ी और 4 गाड़ियों को दूसरे रूट से चलाया
3 टुकड़ों में बंटा कंटेनर जल कर राख, ट्रेन चालक की सूझबूझ से बची लोगों की जान
अमर उजाला ब्यूरो
सतनाली मंडी (महेंद्रगढ़)।
रेवाड़ी-सतनाली-सादुलपुर रेलमार्ग पर नावां हॉल्ट रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार तड़के करीब 2:35 बजे रेलवे लाइन पर एक कंटेनर ट्रेन की चपेट में आ गया। इस हादसे में कंटेनर के परखच्चे उड़ गए और उसमें आग लग गई। उसके आगे का हिस्सा इंजन में फंसकर लगभग 300 मीटर तक घसीटता हुआ चला गया। ट्रेन चालक केसरी सिंह ने आपातकालीन ब्रेक लगाया, जिस वजह से यात्रियों को कोई जानमाल माल का नुकसान नहीं हुआ। हादसे के कारण लोहारू-सतनाली-रेवाड़ी मार्ग पर 8 घंटे रेल यातायात बाधित रहा। 4 ट्रेनें निरस्त की गईं, जबकि 4 के रूट बदलने पड़े। दुर्घटना के बाद दूसरा इंजन मंगवाकर वापस रेवाड़ी ले जाकर रूट बदलकर भिवानी-हिसार-सादुलपुर के रास्ते बीकानेर भेजा गया।
नावां हॉल्ट स्टेशन के पास बने अंडरपास के नजदीक पिलर नंबर 152/8-9 के मध्य वहां से गुजर रहे इलेक्ट्रिक सामान से लदे बड़े कंटेनर के चालक वाहन को अंडरपास के नीचे से गुजारने की बजाय सीधा रेलवे ट्रैक के ऊपर से ले जाने लगा। इसी दौरान यह कंटेनर रेल पटरियों की बीच फंस गया। इतने में अपने निर्धारित समय अनुसार 12457 दिल्ली-बीकानेर सुपरफास्ट आ गई और ट्रैक पर फंसे कंटेनर से जा टकराई। रेलगाड़ी की टक्कर से कंटेनर के परखच्चे उड़ गए और उसमें आग लग गई। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग को बुझाया। इसके बाद दूसरा इंजन 3 घंटे के बाद ट्रेन को लेकर गया।
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इस दौरान रेवाड़ी से दुर्घटना राहत यान भी मौके पर पहुंच गई और क्षतिग्रस्त लाइन पर काम शुरू कर इंजन को पटरी पर लाया। करीब 9:17 बजे इंजन व राहतयान को भेजकर रेल यातायात बहाल किया गया। इस दौरान हमारा वतन सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और रेलवे के अधिकारियों व कर्मचारियों की मदद से करीब आठ घंटे बाद रेलवे ट्रैक को सुचारु किया गया।



घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के अधिकारी मनीष कुमार, मोहर सिंह, रेवाड़ी से सुरेश कुमार, डॉ. किशन कुमार रेवाड़ी, संतोष कुमार, नरेश महेंद्रगढ़, बिशन सिंह, सतनाली के स्टेशन अधीक्षक एसएस वर्मा, लोहारू जीआरपी, आरपीएफ के सुरक्षाकर्मी सहित आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंच गए और तत्परता दिखाते हुए राहत कार्याें में जुट गए। उधर, कंटनेर में गीजर, पंखे, मैगी पेपर रखे हुए थे। हादसे से ट्रक में आग लग गई, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हो गया।

ट्रेन चालक की सूझबूझ ने बचाई सैकड़ों यात्रियों की जान
रेलगाड़ी के चालक केसरी सिंह ने ट्रैक पर कंटेनर को देख सूझबूझ का परिचय देते हुए आपातकालीन ब्रेक लगाकर बड़े हादसे से बचा लिया। रात का समय होने के कारण सभी यात्री गहरी नींद में थे और गाड़ी भी रफ्तार से दौड़ रही थी। गाड़ी के इमरजेंसी ब्रेक लगाने से यात्रियों को कोई जानमाल-माल का नुकसान नहीं हुआ और किसी के हताहत होने का समाचार भी नहीं है।

दूसरा इंजन मंगवाकर भेजी गई ट्रेन
गाड़ी को रेवाड़ी से दूसरा इंजन मंगवाकर करीब 5:20 बजे वापस रेवाड़ी भेजा गया, जहां से रूट बदलकर बीकानेर रवाना किया गया। हादसे के कारण करीब 8 घंटे तक रेलवे ट्रैक बाधित रहा, 4 पैसेंजर गाड़ियां निरस्त करनी पड़ीं और 4 गाड़ियों को दूसरे रूट से चलाया गया।

एक महिला हुई घायल तो दो हुई बेहोश
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रेलगाड़ी के इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बावजूद कंटेनर के एक हिस्से को इंजन करीब 300 मीटर तक घसीट ले गया और बाद में इंजन के चार पहिये भी ट्रैक से उतर गए। हादसे के बाद कंटेनर चालक मौके से फरार हो गया। घटना को देखकर यात्रियों में उतरने के लिए अफरातफरी मच गई। इससे उतरते समय एक महिला गिर कर घायल हो गई। हादसे से लगी आग को देखकर दो महिलाएं बेहोश हो गईं। उनके पास के घर में लेटाया और प्राथमिक उपचार दिया गया।

ग्रामीणों की सहायता से हुआ बचाव
ट्रेन जैसे ही कंटेनर से टकराई तो जोर से आवाज हुई। आग देखकर ग्रामीण रेलवे लाइन के पास पहुंचे। वहां पर उन्होंने कंटनेर और ट्रेन के इंजन में देखकर घरों से पानी लाकर इंजन को बुझाया। इंजन की डीजल टंकी भी लीकेज हो चुकी थी अगर आग वहां तक पहुंच जाती तो शायद एक बड़ा हादसा हो सकता था।
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ये ट्रेन हुई प्रभावित
सादलपुर से तिलकब्रिज-4.30 बजे
रेवाड़ी से बीकानेर -5.45 बजे
रेवाड़ी से हिसार-8.30 बजे
दिल्ली सराय रोहिल्ला-बीकानेर-09.30 बजे रात्रि

पुलिस ने किया मामला दर्ज
आरपीएफ पुलिस प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि कंटनेर चालक आसपास के गांव का था जो इस गाड़ी पर काम करता था। उसने माल को खुर्द बुर्द कर दिया होगा और शेष माल के साथ कंटेनर पटरी पर खड़ा कर ड्राइवर मौके से भाग गया। आरपीएफ चौकी इंचार्ज लौहारू रमेश कुमार ने बताया कि जब अंडर पास बनाया हुआ था तो गाड़ी ऊपर से क्यों ले जाई गई? ट्रेन की पटरी जमीन से 3 फुट ऊंची है जिसको सामान सहित पार करना बहुत मुश्किल काम है। अंडरपास की ऊंचाई लगभग 15 फीट है। प्रतिदिन बड़े ट्रक वहां से गुजरते भी हैं। पुलिस ने ट्रक मालिक और ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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