अवैध कमाई के चक्कर में लड़कों को भी बताई जा रही लड़की
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अवैध कमाई के चक्कर में कुछ लोग आमजन की भावनाओं से कैसे खिलवाड़ कर रहे हैं, इस बात का खुलासा सोमवार को चांदनी रिसोर्ट में पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट पर आयोजित वर्कशॉप में हुआ। इस बैठक में ये तथ्य सामने उभरकर आया कि अब तक जिला प्रशासन के छापा मारने के लिए जितनी भी नकली मरीज बनकर अल्ट्रासाउंड करवाने गई उन सभी के गर्भ में इन गिरोह ने लड़की बताई, लेकिन इन सभी महिलाओं को लड़का पैदा हुआ है।
उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जब सीएमओ डीएन बागड़ी, डॉ. कालरा और डॉ. अशोक ने तथ्यों के साथ रिपोर्ट रखी तो एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई कि जिले में इस गलत धंधे में जुड़े लोग गर्भवती महिला के पेट में लड़की ही बता रहे हैं ताकि एक ग्राहक से दो बार पैसों की वसूली हो। गर्भवती महिला के पेट में लड़की बताकर गर्भ गिराने का काम भी इन्हीं के दलाल करते हैं और भोले-भाले लोग स्वस्थ शिशु को जन्म से पहले ही मरवा डालते हैं। उपायुक्त ने लिंग जांच करने और लिंग जांच के नाम पर लोगों के साथ ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर स्तर की सूचनाओं को एकत्रित किया जाए।
डीसी ने कहा कि इस काम में सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं, आम नागरिक, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य विभाग एक साथ मिलकर ऐसे गिरोह पर नजर रखें। इस गिरोह को हर हाल में जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। डॉ. मित्तल ने हर सप्ताह कमेटी के सदस्यों को बैठक करने के निर्देश दिए ताकि एफआईआर दर्ज होने के बाद सजा होने तक हर केस की पैरवी अच्छी तरह से हो। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त धर्मेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक कमलदीप, जिला न्यायवादी एनडी बिश्नोई आदि रहे।
ये है लिंग जांच की सजा
नारनौल। सीएमओ डॉ. डीएन बागड़ी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लिंग जांच करवाता है तो पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना है। दूसरी बार यही जुर्म करने पर 5 साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना है। अगर कोई डॉक्टर लिंग बताता है तो 5 साल के लिए उसका लाइसेंस रद्द किया जाता है और दूसरी बार यही गलती करने पर जीवन भर के लिए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।
अल्ट्रासाउंड मशीनें भी होती हैं नकली
नारनौल। जिले में स्वास्थ्य विभाग के हाल ही में मारे गए छापों में यह भी सामने आया है कि मोबाइल अल्ट्रासाउंड के नाम पर जिले के लोगों से ठगी हो रही है। छापों के बाद बरामद सामान में कई बार एक्सरे, ईसीजी मशीन और आईसीयू मॉनिटर से ही अल्ट्रासाउंड करने का ड्रामा रचते हैं। आम नागरिकों को इन मशीनों का पता न होने के कारण इस तरह के गिरोह आसानी से उनसे पैसे वसूल लेते हैं। विगत दिनों मारे गए एक छापे में भी आसीयू मानिटर से ही अल्ट्रासाउंड का ड्रामा करके गर्भवती महिला को लड़की बताया था।
अधिकारियों के साथ बैठक करती उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल।