अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
हरियाणा राज्य के लिए अलग उच्च न्यायालय बनाने के लिए अधिवक्ताओं ने आवाज उठाई है। इस मांग के लिए बुधवार को अधिवक्ताओं ने समस्त अदालती कार्यों को भी स्थगित रखा। जिला बार एसोसिएशन ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित करके मांग की है कि हरियाणा राज्य के लिए अलग से उच्च न्यायालय हो तथा न्यायाधीशों का अनुपात बराबर हो।
जिला बार एसोसिएशन प्रधान मनीष वशिष्ठ एडवोकेट ने बताया कि 1966 में पंजाब प्रांत से अलग करके हरियाणा को अलग प्रांत बना दिया गया था, लेकिन आज हरियाणा बनने के 52 वर्ष बाद भी हरियाणा को उच्च न्यायालय में उसका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जजों की नियुक्ति का अनुपात 60:40 है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जजों का अनुपात 50:50 का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश के साथ भेदभाव हो रहा है। वशिष्ठ ने कहा कि हरियाणा में चाहे किसी की भी सरकार रही हो, लेकिन वे अभी तक प्रदेश के लिए अलग से उच्च न्यायालय स्थापित करवाने में कामयाब नहीं रहे हैं। इस मामले में अभी तक किसी भी सरकार ने प्रयास नहीं किया है, अपितु चुनावी जुमलों तक ही सीमित रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा बनने के बाद जितने भी प्रांत बने हैं, उन सबकी अपनी अलग हाईकोर्ट है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में स्थित है, जो इस क्षेत्र से करीब 400 किलोमीटर दूर है, जिसके कारण आमजन को न्याय के लिए बहुत अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी मांग की कि हाईकोर्ट की पीठ दक्षिणी हरियाणा में किसी स्थान पर स्थापित की जानी चाहिए। प्रदेश व केन्द्र की सरकार से भी अनुरोध किया कि वह इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएं। इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन के उप प्रधान आशीष चौधरी, सचिव हरीश कुमार, सह सचिव गजानंद दौचानिया आदि उपस्थित थे।