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भविष्य में जल प्रबंधन बन सकता है गंभीर खतरा : प्रो. चौधरी

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कुरुक्षेत्र। प्रतिभागियों को संबो​धित करते प्रो. एआर चौधरी। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में राजीव गांधी राष्ट्रीय भूजल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान रायपुर और केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र चंडीगढ़ के सहयोग में एक्वाइफर मैपिंग, भूजल से संबंधित मुद्दे व भूजल प्रबंधन विषय पर तृतीय स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य भूजल की वर्तमान स्थिति, उसके वैज्ञानिक प्रबंधन और भविष्य की जल चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना रहा।
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मुख्य अतिथि विवि छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं दर्शन लाल जैन शोध उत्कृष्टता केंद्र ऑन सरस्वती रीवर के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए एक्वाइफर मैपिंग केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रो. चौधरी ने चेताया कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और बिना वैज्ञानिक जानकारी के किया गया जल प्रबंधन भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। एक्वाइफर मैपिंग के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से जाना जा सकता है कि भूगर्भ में जल कहां उपलब्ध है, उसकी मात्रा कितनी है, गुणवत्ता कैसी है और उसका सतत व वैज्ञानिक दोहन कैसे किया जा सकता है।

डॉ. मनीषा संधू, भू-भौतिकी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने भूजल अन्वेषण व प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता निधिश वर्मा, क्षेत्रीय निदेशक, केन्द्रीय भूजल बोर्ड ने की। आयुष केशरवानी, डॉ. अर्पण शास्त्री (आईआईएसईआर, मोहाली) और ऋषि राज सहित कई विशेषज्ञों ने भूजल संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए। तकनीकी सत्रों में हरियाणा में भूजल की वर्तमान स्थिति, एनएक्यूआईएम परियोजना, हाइड्रोजियोलॉजी के मूल सिद्धांत, केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों की उपलब्धता और भूजल प्रबंधन में आइएनएसएआर तकनीक के उपयोग जैसे अहम विषयों पर व्याख्यान दिए गए। इस मौके पर विद्यानंद नेगी, वैज्ञानिक-डी, केंद्रीय भूजल बोर्ड, डॉ. मयंक दीक्षित सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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