वार्ड नं 19 का मामला हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट और राज्य चुनाव आयोग के अलावा मुख्यमंत्री दरबार भी पहुंच गया है। यह मामला आरोपों से घिरे विधायक सुभाष सुधा लेकर पहुंचे हैं। सुधा ने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अमर उजाला से बातचीत में विधायक सुधा ने बताया कि उन पर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली सुमनलता के पति ने वोट कटवाने से लेकर उन्हें जबरन उठाने व धमकी दिए जाने सहित कई संगीन आरोप लगाए हैं। ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी इस मामले के पीछे के षड्यंत्र की जांच करने और दोषी को सामने लाने की मांग की है। वहीं पार्टी स्तर पर भी अब जांच के लिए मांग उठने लगी है। सुधा ने इस मामले को मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के सामने रखा है और इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
पूरे प्रकरण के पीछे बड़ा षड्यंत्र : सुधा
सुधा ने कहा कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री क्या निर्णय लेंगे, यह उनका अधिकार है, लेकिन उन्होंने अन्य कई मंत्रियों व विधायकों के साथ मिलकर यह मांग की है। सुधा ने बताया कि इस पूरे प्रकरण के पीछे एक बड़ा षड्यंत्र रहा है। इसका पर्दाफाश किया जाना चाहिए। दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए, ताकि दोबारा से इस प्रकार का प्रकरण दोहराया न जाए। उन्होंने बताया कि यह उनके व वार्ड नं 19 से पार्षद का चुनाव लड़ रही उनकी पत्नी उमा सुधा के खिलाफ रची गई साजिश है और उन्हें उम्मीद है कि इसका जल्द ही पर्दाफाश भी हो जाएगा।
उमा सुधा के निर्विरोध पार्षद बनने पर लगी मुहर
नगर परिषद चुनाव के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही जहां परिषद चुनाव होने का रास्ता फिर से खुल गया है वहीं वार्ड नं 19 से चुनाव मैदान में उतरी पूर्व पार्षद उमा सुधा के निर्विरोध चुने जाने पर भी मुहर लग गई है। थानेसर के विधायक सुभाष सुधा की पत्नी उमा सुधा से संबंधित इसी वार्ड को लेकर ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इस वार्ड से चुनाव लड़ने की इच्छुक सुमनलता ने अपना वोट ही वोटर लिस्ट में नहीं होने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने पहले वार्ड नं 19 के चुनाव पर रोक लगाई थी। बाद में देर रात को आदेश बदल कर थानेसर के सभी 31 वार्डों के चुनाव पर रोक लगा दी थी। हालांकि नामांकन वापस लिए जाने के दिन 13 मई को ही उमा सुधा को निर्विरोध चुने जाने के दावे किए गए थे। मिठाई भी बांट दी थी, लेकिन यह खुशी उस समय एकाएक गायब हो गई थी, जब सुमनलता की याचिका पर हाईकोर्ट ने चुनाव पर रोक लगाई। लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के बाद उमा सुधा के चुने जाने पर मुहर लग गई है। बता दें कि इस वार्ड से दूसरा कोई प्रत्याशी उनके विरोध में नही खड़ा है। ऐसे हालात में उमा सुधा का कहना है कि यह उनके द्वारा पूर्व में दो बार रहे पार्षद कार्यकाल के दौरान करवाए गए कार्य का ही परिणाम है कि आज उन्हें सभी ने निर्विरोध चुनने का निर्णय लिया है।
वोट डालने का भी छीन लिया हक : सुमनलता
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेने वाली और वार्ड नं 19 से चुनाव लड़ने की इच्छुक सुमनलता व उनके पति अशोक कुमार सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने पर मायूस दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि उनके वोट काटने के पीछे षड्यंत्र रहा है। वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से राय लेंगे। वह अपने मौलिक अधिकार को हासिल करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा व लोकसभा में जिस जनता ने वोट देकर वर्तमान सरकार को बनाया था, आज वही सरकार उसी जनता के वोट डालने जैसे हकों को भी खत्म कर रही है। वोट कटवाया जाना अत्यंत घिनौना कार्य है और इससे काफी संख्या में मतदाता शिकार हुए हैं।