कुरुक्षेत्र। श्रीमद भागवत कथा करते हुए कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री । विज्ञप्ति
- फोटो : आर्काइव
कुरुक्षेत्र। पितृ पक्ष पर विष्णु कॉलोनी के ट्यूबवेल पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा जारी रही। इसमें भागवत प्रवक्ता कथावाचक अनिल शास्त्री ने विष्णु पद धाम का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि देश के 52 शक्तिपीठों में तीन की महिमा तो अपरंपार बतलाई जाती है।
इनमें कामाख्या (असम) के जननपीठ, मां मंगलागौरी (गया) के पालनपाठ व ज्वालामुखी (हिमाचल प्रदेश) के संहार पीठ के रूम में शास्त्र, पुराणों में वर्णित है। गया धाम में गयासुर नामक दैत्य के तारक, उद्धारक के रूप में पालक ब्रह्म भगवान विष्णु का अवतार भी गयासुर के साथ-साथ समस्त प्राणियों के उद्धार के लिए हुआ जिनका चरण चिह्न गयाधाम के विष्णुपद मंदिर में अब भी विशाल शालिग्राम शिला पर विद्यमान है। इनके दर्शन, स्पर्श व चरणामृत पान से पापियों को भी मोक्षफल की प्राप्ति सुलभ हो जाती है। यहां पितरों का श्राद्धकर्म करने से जन्म-जन्मांतर से मुक्ति मिल जाती है।
उन्होंने कहा कि गरुड़ पुराण के अनुसार भगवान राम ने गयाजी तीर्थ में पिंडदान करने की शुरुआत की थी। मान्यताओं के अनुसार राजा दशरथ का पिंडदान करने के लिए भगवान राम, सीता और लक्ष्मण गयाजी आए थे। विष्णुपद मंदिर के निर्माण के संदर्भ में कहा जाता है कि इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने वर्ष 1766-1787 में गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इससे पहले भगवान विष्णु का चरण चिह्न विद्यमान था जहां छोटा सा मंदिर था। विष्णुपद मंदिर की ऊंचाई 100 फीट है जिसमें 58 वर्ग फीट का मंडप है। मंदिर के शीर्ष पर स्वर्ण ध्वज कलश के साथ है जिसे हम दूर से ही देख सकते हैं। भगवान विष्णु का चरण चिह्न 13 इंच लंबा है। इसी से इस मंदिर का नाम विष्णुपद मंदिर है।
कुरुक्षेत्र। श्रीमद भागवत कथा करते हुए कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री । विज्ञप्ति- फोटो : आर्काइव