संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते शिल्पकारों से लेकर पर्यटक तक हर कोई धर्मनगरी की ओर आकर्षित हो रहा है। शायद यही कारण है कि ब्रह्मसरोवर तट पहली बार देश के 23 राज्यों की शिल्पकला का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। महोत्सव में 23 राज्यों के 230 शिल्पकार जुटे हैं, जिनकी शिल्प कला को देख हर कोई हैरान है। इन शिल्पकारों में नौ राष्ट्रीय अवार्डी, 17 स्टेट अवार्डी, पांच राष्ट्रीय व नौ राज्य प्रमाणपत्र से सम्मानित है। यहीं नहीं एक शिल्पगुरुकलानिधि अवार्डी तो दो संत कबीर अवार्डी शिल्पकार भी पहुंचे हैं। इनकी कला को देख पर्यटक बरबस ही ठहर जाते हैं।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, जिला प्रशासन व एनजेडसीसी के प्रयासों के चलते 23 राज्यों से आए शिल्पकारों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश से 63 शिल्पकार है। जम्मू कश्मीर से 25, हरियाणा से 15, गुजरात से चार, पंजाब से 19, पश्चिम बंगाल से 12, राजस्थान से 10, दिल्ली से 21, कर्नाटक से एक, तेलंगाना से 10, उत्तराखंड से चार, आंध्रप्रदेश से एक, असम , महाराष्ट्र व हिमाचल प्रदेश से पांच-पांच, बिहार से तीन, मध्यप्रदेश से सात, छत्तीसगढ़, पांडिचेरी, झारखंड से दो-दो, गोवा से एक, चंडीगढ़ से 10 व तमिलनाडु से चार शिल्पकार पहुंचे हैं। इन शिल्पकारों के आते ही ब्रह्मसरोवर तट पर पूरे देश की लोक व शिल्पकला का संगम दिखाई देने लगा है।
ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे शिल्पकारों में नौ शिल्पकार राष्ट्रीय अवार्डी, पांच राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से सम्मानित, 17 स्टेट अवार्डी, दो संत कबीर अवार्डी, एक कलानिधि, एक शिल्पगुरू, एक हैंडीक्राफ्ट, नौ राज्य स्टेट प्रमाण पत्र व एक एमएसएमई मंत्रालय से शामिल है। पहली बार अकेले जम्मू कश्मीर से छह राष्ट्रीय अवार्डी, तीन स्टेट अवार्डी और एक शिल्प गुरु अवार्डी शिल्पकार है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से पांच राष्ट्रीय अवार्डी, आठ स्टेट अवार्डी, दो संत कबीर अवार्डी, दो राज्य प्रमाण पत्र आवार्ड से सम्मानित है। मेजबान हरियाणा से भी एक कला निधि अवार्डी, एक स्टेट अवार्डी, एक हैंडीक्राफ्ट अवार्डी और तीन मेरिट प्रमाणपत्र अवार्डी शामिल हैं।
इनमें दिखाई शिल्पकला
इन शिल्पकारों की ओर से हैंडलूम, टेक्सटाइल, लेदर, कांस्य मैटल ज्वैलरी, कैन एंड बम्बू, कलमकारी ड्रेस मेट, हैंड प्रिंटेड टेक्सटाइल, जैकेट-कोट, शॉल, बेड शीट, बेड कवर, फ्लोर कवरिंग, पैच वर्क, वूडन कारविंग, लैदर आर्ट, ज्वैलरी, टेराकॉट पॉट, डोल एंड टवायज, वूडन टवायज, वूडन एंड जरी, पेंटिंग्स, जयपुरी रजाई, नामदा, स्टोन कारविंग, मीनाकारी ज्वैलरी, पैडी एंड स्ट्रा क्राफ्ट, ड्राई फ्लवार, सोलापिट, पोईट्री एंड क्ले, पंजाबी जूती, फुलकारी, पशमीना शॉल, कनी शॉल, पेपर मच्ची, कावा एंड ड्राई फ्रूट, करुवा बूटी साड़ी, ब्लू आर्ट पोईट्री पर्यटकों के लिए दुकानें सजाई गई है।
साड़ी पर कलाकारी कर राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके तीन भाई
वाराणसी के रहने वाले शिल्पकार जलालुदीन बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2000 में जामदानी रंगकाट साड़ी तैयार की तो इसे देखकर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी कायल हो गए थे। उन्हें अवार्ड दिया गया। साड़ी पर ही कारीगरी कर उसके भाई आइनुल हक, मुईनुदीन भी राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हो चुके हैं। पूरा परिवार इसी कारीगरी में जुटा है और कुरुक्षेत्र में 15 वर्षों से आ रहे हैं।
मेले में ब्रह्मसरोवर तट पर अपनी शिल्पकला दिखाते शिल्पकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra