कुरुक्षेत्र। टीबी यानी ट्युबरक्यूलोसिस (क्षय रोग) को वैसे तो बीते जमाने की बीमारी के तौर पर देखा जाता है, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद भी टीबी के मरीजों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। कुरुक्षेत्र में हर साल 1500 से 2000 के बीच मरीज टीबी संक्रमित मिल रहे हैं और 70 से अधिक मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो दुनियाभर में कोरोना संक्रमण फैलने से पहले एड्स के बाद सबसे ज्यादा मौतें टीबी से हो रही हैं। वैसे तो टीबी लाइलाज नहीं है, लेकिन अगर इसके इलाज में लापरवाही बरती जाती है तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
पौने तीन साल में 4842 संक्रमित मरीज, 186 ने उपचार के दौरान तोड़ा दम
वर्ष मरीज मौत
2018 1751 71
2019 1852 80
2020 1239 35
नोट:- वर्ष 2019 में 1852 मरीजों में से 925 मरीज ऐसे थे, जिन्हें फेफड़ों में टीबी थी, जबकि 654 मरीजों को शरीर के अन्य अंगों में टीबी के लक्षण मिले थे, जबकि 11 मरीज ऐसे थे, जिन्होंने उपचार नहीं कराया।
टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है : डॉ. आशीष
फिजीशियन डॉ. आशीष अनेजा के अनुसार टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। शरीर में यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। देश में सबसे ज्यादा फेफड़ों के ही टीबी मरीज हैं। हालांकि ब्रेन, यूट्रस, मुंह, लीवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के विभिन्न हिस्सों में भी टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं। खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों से यह संक्रमण फैलता है। फेफड़ों के अलावा जितनी भी तरह की टीबी होती है वह एक से दूसरे में फैलने वाली नहीं होती।
टीबी का बैक्टीरिया शरीर के हिस्से के टिश्यू को पूरी तरह करता है नष्ट
डॉ. अनेजा के अनुसार टीबी का बैक्टीरिया शरीर के जिस भी हिस्से में होता है, उसके टिश्यू को पूरी तरह नष्ट कर देता है और इससे उस अंग का काम प्रभावित होता है। जैसे फेफड़ों में टीबी है तो फेफड़े धीरे-धीरे बेकार हो जाते हैं, यूट्रस में है तो इन्फर्टिलिटी (बांझपन) की वजह बनती है, हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है, ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, लीवर में टीबी होने पेट में पानी भरने लगता है। बताया कि बच्चों के लिए टीबी ज्यादा घातक होती है। इसलिए पैदा होते ही बच्चे को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। बच्चे को टीबी हो जाए तो उसके पूरे शरीर में फैल सकती है।
कैसे करें बचाव
- टीबी से बचने का सबसे आसान तरीका है कि इम्यूनिटी मजबूत करना।
- न्यूट्रिशन से भरपूर खासकर प्रोटीन डायट (सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि) का सेवन करना चाहिए।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।
- कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर नहीं रहना चाहिए।
- टीबी के मरीज से कम-से-कम एक मीटर की दूरी बनाकर रहना चाहिए।
- ऐसे मरीज को मास्क पहनाकर रखना चाहिए।
- टीबी के मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें।
शरीर के जिस हिस्सें में होती है टीबी, उसकी के अनुसार होते हैं टेस्ट : डॉ. विनोद
पैथोलॉजिस्ट डॉ. विनोद तंवर के अनुसार शरीर के जिस हिस्से में टीबी है, उसके मुताबिक टेस्ट होता है। फेफड़ों की टीबी के लिए मरीज के बलगम की जांच होती है जो सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटर पर फ्री में होती है। अगर बलगम में टीबी नहीं मिलता है तो एएफबी कल्चर की जांच होती है। इसकी रिपोर्ट 6 हफ्ते में आती है। इस जांच में यह भी पता चल जाता है कि किस लेवल की टीबी है और दवा असर करेगी या नहीं। सरकार ने इस टेस्ट के लिए लिमिट तय की हुई है। किडनी की टीबी के लिए यूरीन कल्चर टेस्ट होता है। यूट्रस की टीबी के लिए सर्वाइकल स्वैब लेकर जांच होती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास जारी : डॉ. संदीप अग्रवाल
जिला क्षय एवं कुष्ठ रोग विभाग के नोडल अधिकारी उप सिविल सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में टीबी का निशुल्क उपचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। यही नहीं, टीबी से संक्रमित मरीज को निक्षय योजना के तहत प्रति माह 500 रुपये अनुदान राशि उनके बैंक खातों में डाली जा रही है।