कार्यशाला को संबोधित करते सत्र अध्यक्ष सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी के कुलगुरु प्रो. ललित कुमार
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में व्यक्तित्व का समग्र विकास एवं चरित्र निर्माण : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन रविवार को हुआ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत और एनआईटी कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में 14 राज्यों और 40 से अधिक शिक्षण संस्थानों से आए 430 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की।
दो दिनों तक चले सत्रों में शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और आधुनिकता को जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोशीय शिक्षा मॉडल और एनईपी-2020 के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर मंथन किया। उद्घाटन सत्र में भू-राजनीतिक विश्लेषक अंकित शाह ने कौशल आधारित मॉडल और सनातन आर्थिक दृष्टिकोण को शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। चेयरपर्सन डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार ने वेद, रामायण और वसुधैव कुटुंबकम को शिक्षा का आधार बताते हुए कहा कि जब शिक्षा जीवन को संस्कारित करती है, तभी समाज का उत्थान होता है।
निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजन ही भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में ठोस कदम सिद्ध होंगे। समापन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और समाजोपयोगी बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने शिक्षक की भूमिका और चरित्र निर्माण के महत्व पर विचार साझा किए। कार्यशाला संयोजक प्रो. हितेंद्र त्यागी और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष प्रो. सतहंस की भूमिका की सराहना की गई।