कुरुक्षेत्र। अपने जुनून को पूरा करने के लिए एक शिल्पकार ने मूर्ति बनाने के लिए शादी में मिले तीन लाख के गहने बेच दिए। आज वह मूर्ति शिल्पकार पूरी दुनिया में मुकाम हासिल कर चुकी हैं। हैदराबाद की रहने वाली शिल्पकार डॉ. स्नेहलता प्रसाद हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानती हैं। डॉ. स्नेहलता अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विशेष विषय के साथ पत्थर को तराश रही हैं। इस पत्थर पर जय जवान-जय किसान के नारे को अंकित करेंगी, वहीं सेना में हरियाणा की अधिक भागीदारी होने के कारण इसे आजादी के अमृत महोत्सव के साथ जोड़ेंगी। इसके साथ चक्रव्यूह की रचना भी पत्थर पर करेंगी।
शिल्पकार डॉ. स्नेहलता प्रसाद ने कहा कि उन्हें बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक रहा और इसके लिए वे लगातार प्रयास करती रहीं। इन प्रयासों के कारण उन्होंने मूर्ति शिल्पकला में धीरे-धीरे अपनी एक पहचान बनाई। वर्ष 2002 में मूर्ति शिल्पकला पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उनका विवाह डॉ. प्रसाद के साथ हुआ। इस दौरान उनके पास मूर्ति बनाने के लिए पैसे की कमी पड़ गई और करीब दो महीने जब कोई चारा न रहा तो उन्हें अपने पति की इच्छा से शादी में मिले गहने बेचने पड़े। इन गहनों को बेचने से करीब तीन लाख रुपये की लागत से पत्थर, पेंटिंग का सामान और कुछ अन्य सामान खरीदा।
उन्होंने कहा कि वह अपना अधिकतर समय मूर्ति शिल्पकला में ही लगा रही हैं। हालांकि उनकी एक बेटी और बेटा भी है, जबकि उनके पति हैदराबाद में 100 बेड का अस्पताल चला रहे हैं। जब वह हैदराबाद में होती हैं तो अस्पताल में एक निदेशिका के रूप में कार्य करती हैं।
हरियाणा में मिला पांच मूर्तियां बनाने का सौभाग्य
डॉ. स्नेहलता ने बताया कि वह हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानती हैं, इसलिए इस प्रदेश में उन्हें सबसे ज्यादा पांच मूर्तियां बनाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। इस महोत्सव में आजादी के अमृत महोत्सव को महाभारत से जोड़कर और हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश होने के नाते जय जवान और सेना में अधिक भागीदारी होने के साथ जय जवान के नारे को भी अपनी शिल्पकला में शामिल कर रही हैं। इस समय पत्थर को तराशकर चक्रव्यूह, जय जवान-जय किसान और आजादी के अमृत महोत्सव का लोगो तैयार करेंगी।