शहर से रोजाना करीब 70 टन कूड़ा उठाने वाले टिप्पर नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही से मात्र सात साल में कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। रखरखाव न होने के कारण कई टिप्परों की बॉडी गल गई तो कुछ के टायर गायब हो गए हैं। एक टिप्पर पर अभी भी टेंपरेरी नंबर लगा है, लेकिन इसकी बॉडी भी गल गई है। नगर परिषद के अधिकारियों ने कबाड़ बने टिप्पर दमकल विभाग के पीछे कचरे के बीच खड़े करा दिए हैं।
नगर परिषद ने वर्ष 2014 के बाद अलग-अलग समय पर करीब तीन करोड़ 60 लाख में 81 टिप्पर खरीदे थे। प्रति टिप्पर कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये थी। मात्र सात साल में इनमें से करीब 15 टिप्पर कबाड़ में तब्दील हो गए। यह टिप्पर दमकल विभाग के पीछे खड़े हैं। वहीं कुछ खराब टिप्परों को सेक्टरों के कम्यूनिटी सेंटरों में भी खड़ा किया गया है। टिप्परों के ऐसे हालात तब हैं, जब नगर परिषद इनके रखरखाव पर दो लाख से ज्यादा की राशि प्रतिमाह खर्च करती है। इतना ही नहीं घर-घर कूड़ा उठाने से मिलने वाला शुल्क भी इनके रखरखाव पर लगाया जाता है।
दमकल विभाग के पीछे खड़े टिप्पर के चारों टायर, बॉडी, लाइट व आगे की नंबर प्लेट गायब है। टिप्पर को जंग लगी है। इसके अलावा ऐसा ही एक और टिप्पर खड़ा है, जिसकी बॉडी और नंबर प्लेट दोनों गायब हैं। चार खस्ताहाल टिप्परों पर नंबर प्लेट ही नहीं लगी है। एक टिप्पर टेंपरेरी नंबर का है, लेकिन इसकी भी बॉडी गल गई है। यहां पर 13 टिप्पर खड़े हैं, जिनमें 10 की हालत खस्ता है।
उल्लेखनीय है कि नगर परिषद के पास शहर में साफ सफाई के लिए 81 टिप्परों के अलावा 7 ट्रैक्टर ट्राली, 2 जेसीबी, 2 डंपर व 1 जेसीबी ट्रैक्टर है। इनके मेंटेनेंस पर प्रति माह करीब दो लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। प्रति माह 9 से 10 लाख रुपये का डीजल लगता है। 81 टिप्परों पर 81 ड्राइवर और 62 हेल्पर हैं, जिनमें ड्राइवरों को 18 लाख 22 हजार व हेल्परों को 10 लाख 97 हजार वेतन प्रति माह दिया जाता है। इसके अलावा नप ने मई 2020 से फरवरी 2021 तक से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कर 51 लाख की राशि अपने खाते में जमा की है। घरों से कूड़ा उठाने के लिए नगर परिषद ने करीब सात वर्ष पूर्व टिप्पर चलाए थे। इससे पहले सफाई कर्मचारी रेहड़ी में कचरा उठाया करते थे। वर्ष 2014 में नप ने टिप्पर खरीदने शुरू किए। पहले प्रोजेक्ट में 20 टिप्पर चलाए गए, लेकिन शहर से कूड़ा अधिक मात्रा में निकलने के कारण दूसरे प्रोजेक्ट में 30 टिप्पर और मंगवाए गए। इसके बाद अलग-अलग समय पर 31 टिप्पर और खरीदे गए। संवाद
टिप्परों से गायब टायर व बॉडी की होनी चाहिए जांच: सुदेश
वार्ड नंबर 9 से पार्षद सुदेश चौधरी ने कहा कि यह टिप्पर जनता के पैसों से खरीदे हुए हैं। इनका कबाड़ हो जाना सीधे तौर पर नगर परिषद चेयरमैन और अधिकारियों की घोर लापरवाही है। नगर परिषद टिप्परों की देखरेख के लिए कूड़ा निस्तारण के नाम पर प्रति माह लाखों रुपये जनता की जेब से ही निकालती है, फिर भी टिप्परों की हालत खस्ता हो गई है। वह मामले को हाउस की बैठक में उठाएंगी।
सात साल में ही टिप्पर कंडम हो जाना जांच की विषय: निंदी
वार्ड तीन से पूर्व पार्षद नरेंद्र शर्मा निंदी ने कहा कि टिप्परों को खरीदे अभी पांच से सात साल ही हुए हैं। ऐसे में इतनी जल्दी इनका कंडम हो जाना जांच का विषय है। कंडम खड़े टिप्परों से जो भी सामान गायब है, आखिर वह कहां गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
कूड़े के कारण गल जाती है बॉडी : रविंद्र
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी रविंद्र कुहाड़ ने कहा कि टिप्परों से कूड़े का उठान होता है, इस वजह से इनकी बॉडी गल जाती है। नगर परिषद की ओर से समय-समय पर मेंटेनेंस कराई जाती है। वहीं दमकल विभाग के पीछे कबाड़ खड़े टिप्पर उनके संज्ञान में नहीं है।