कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने वैश्विक शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भूभौतिकी विभाग के वैज्ञानिकों को भूकंपीय खतरे के आकलन से जुड़ी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना प्रदान की गई है। यह परियोजना केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की ओर से भारत-इटली संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।
प्रमुख अन्वेषक डॉ. आरबीएस यादव के मुताबिक इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भूकंपीय क्षेत्र चतुर्थ में आने वाले राजधानी क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के लिए एक विश्वसनीय और समय-निर्भर भूकंपीय खतरा मॉडल विकसित करना है। इस मॉडल के माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि भविष्य में किस क्षेत्र में किस प्रकार का भूकंपीय जोखिम हो सकता है। इससे भूकंप से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. मनीषा संधू का कहना है कि आमजन के लिए यह परियोजना बेहद लाभकारी साबित होगी। शोध से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भूकंप-रोधी भवनों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। शहरी विकास, आपदा प्रबंधन और निर्माण मानकों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा जिससे जन-धन की हानि कम होगी। साथ ही, सरकार और संबंधित एजेंसियों को आपदा से पहले तैयारी करने में वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
यह परियोजना न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाएगी बल्कि आम लोगों की सुरक्षा, सुरक्षित आवास और टिकाऊ विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिये विकसित होने वाली नई तकनीकें भविष्य में पूरे देश के लिए भूकंप जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाने में सहायक होंगी। इस परियोजना पर 2028 तक कार्य पूरा करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय परियोजना में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा और उत्तर भारत का एकमात्र विवि
इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा और उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जिसे यह अवसर प्राप्त हुआ है। परियोजना का चयन वैज्ञानिक गुणवत्ता, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और शोधकर्ताओं की विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। इसके अंतर्गत भारतीय और इतालवी वैज्ञानिक आपसी यात्राओं, साझा अध्ययन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान करेंगे। शोध दल में विवि के भूभौतिकी विभाग से डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) और डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) शामिल हैं। इनके साथ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय नई दिल्ली से डॉ. एपी सिंह और सीएसआईआर-एनईआईएसटी असम से डॉ. शांतनु बरुआ भी इस परियोजना में सहयोग कर रहे हैं।
अनुसंधान के क्षेत्र में विवि ने स्थापित किए नए आयाम
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विवि के भूभौतिकी वैज्ञानिकों की टीम को भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिलना गर्व का विषय है जो केयू की वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता, उत्कृष्टता एवं प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने विभाग के चेयरमैन प्रो. भगवान सिंह चौधरी सहित परियोजना पर कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित भी किया।
कुरुक्षेत्र। सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. मनीषा संधू।