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Kurukshetra News: श्राद्ध अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण

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कुरुक्षेत्र।  पूजा-अर्चना करते श्रीगीता कुंज आश्रम के सदस्य। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर रविवार को ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और सरस्वती तीर्थ पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों और पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान, हवन-यज्ञ और पूजा-अर्चना करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाई और अपने पितरों का तर्पण कर मोक्ष की कामना की।
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शास्त्रों के अनुसार सरस्वती तीर्थ पर श्राद्ध पक्ष में पिंडदान करने का विशेष महत्व माना गया है। यहां पितरों को तर्पण करने से उन्हें कई गुना मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते श्राद्ध अमावस्या पर क्षेत्र के साथ-साथ देशभर से लोग कुरुक्षेत्र पहुंचे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने जगह-जगह भंडारे आयोजित किए। आने वाले लोगों को प्रसाद व पेयजल की व्यवस्था करवाई गई। दिनभर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। श्राद्ध अमावस्या पर अंतिम दिन यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। श्रद्धालुओं ने बताया कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए यहां आकर तर्पण करना जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
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भीड़ बढ़ने के चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई लेकिन पुलिसकर्मियों की तैनाती से रास्ते को सुचारू रूप से संचालित किया गया। अंबाला रोड पर ड्रेन पुल के पास एक ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
पितृपक्ष में पितरों की आत्माएं आती हैं पृथ्वी पर : स्वामी मुक्तानंद
ज्योतिसर स्थित श्रीगीता कुंज आश्रम बद्रीनारायण मंदिर में चतुर्मास के अवसर पर चल रहे विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं हवन यज्ञ में दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। डॉ. नीलिमा शांगला ने कहा कि स्वामी मुक्तानंद मौन व्रत धारण किए हुए हैं। देर सायं ब्रह्मसरोवर पर पधारे स्वामी मुक्तानंद एवं डॉ. नीलिमा शांगला ने सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पूजा-अर्चना की।
लिखित रूप में संदेश देते हुए स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों की आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं, ताकि वे अपने वंशजों की ओर से दिया गया भोजन, जल और तर्पण ग्रहण कर सकें लेकिन यदि उन्हें श्राद्ध से तृप्ति नहीं मिलती, तो वे असंतुष्ट होकर लौट जाते हैं और परिवार को कष्ट देते हैं। जो लोग पूरे पितृपक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दिन श्राद्ध करने से सभी पितर तृप्त हो जाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। यह दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति और वंशजों के कल्याण के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

कुरुक्षेत्र।  पूजा-अर्चना करते श्रीगीता कुंज आश्रम के सदस्य। स्वयं

कुरुक्षेत्र।  पूजा-अर्चना करते श्रीगीता कुंज आश्रम के सदस्य। स्वयं

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