कुरुक्षेत्र। बम-बम भोले.. हर-हर महादेव के उद्घोषों से धर्मनगरी गूंज उठी। मौका था सावन माह के दूसरे सोमवार को प्राचीन स्थानेश्वर महादेव मंदिर की ओर से निकाली भगवान शिव की पालकी यात्रा का, जिसका जगह-जगह स्वागत किया गया। रमेश सचदेवा ने बताया कि मंदिर से आरंभ हो कर पालकी यात्रा मसीता हाऊस, खातापुर मोहल्ला, जैन गली, आचार वाली गली, छोटा बाजार, सब्जी मंडी मोती चौक, पालिका बाजार, कच्चा घेर , नया बाजार, जोशियान मोहल्ला, चक्रवर्ती मोहल्ला, शिवाजी गली, दर्रा खेड़ा वाली से गली से होकर वापस मंदिर में संपन्न हुई।
पालकी के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर की ओर से सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पालकी निकाली जाती है। स्थाण्वीश्वर महादेव मंदिर के प्रबंधक स्वामी लक्ष्मी नारायण पुरी ने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बरसाते हैं। सावन माह भगवान शिव कर प्रिय माह है। मंदिर में सावन माह में पूजन के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कि भू-लोक के लिए सावन मास भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम समय है। समुद्र मंथन सावन मास में ही हुआ था, जिससे भगवान शिव का नाम नीलकंठ महादेव पड़ा था। लक्ष्मी नारायण पुरी ने बताया कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को अपने गले में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था, इसलिए सावन मास में शिवलिग पर जल अर्पण करने का खास महत्व है। इस मौके पर महामंडलेश्वर विघा गिरी, महंत बंशी पुरी, महंत लक्ष्मीनारायण पुरी, महंत रंगानाथ पुरी, महंत शिवानंद पुरी, मुकेश गिरी व स्वामी आशुतोष आदि मौजूद रहे।