कुरुक्षेत्र। विभिन्न जिलों में लुप्त हो चुके 48 कोस कुरुक्षेत्र के अधीन 18 और तीर्थों को नई पहचान मिलने वाली है। इससे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत 200 तीर्थ हो जाएंगे। छह माह बाद आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से पहले इन तीर्थों को सूचीबद्ध कर लिया जाएगा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने इस संर्दभ में योजना को अमलीजामा पहनाते हुए प्रयास तेज कर दिए हैं। बोर्ड की सर्वेक्षण टीम ने इन तीर्थों का पौराणिक, साहित्यक व ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण कर अध्ययन किया है और अब एक-एक तीर्थ पर दस्तक देने की तैयारी है।
अगले एक सप्ताह तक यह कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। टीम हर तीर्थ पर पहुंचकर मिले दस्तावेजों के अनुसार व अन्य प्रमाणों का मिलान करेगी। ये तीर्थ उक्त तथ्यों के अनुसार कितने पुराने हैं, क्या महत्व है और इनकी कितनी सार्थकता है। इनका ऐतिहासिक व पुरातात्विक पहचान भी रही है या नहीं और कैसे ये विलुप्त हो गए। यह सब खोजबीन की जाएगी। पूरी तरह से सूचीबद्ध करने के उपरांत गीता महोत्सव में इन तीर्थों का ऐलान कर दिया जाएगा।
2021 में 22 साल बाद जोड़े गए थे 30 नए तीर्थ
स्व. गुलजारी लाल नंदा की अध्यक्षता में एक अगस्त 1968 को गठित हुए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पास वर्ष 1999 तक 134 तीर्थ 48 कोस की परिधि में थे। 22 साल बाद केडीबी की सूची में 30 नए तीर्थों को जोड़ा गया तो इसके दो साल बाद ही 18 और तीर्थ जोड़े गए, जिसके बाद तीर्थों की संख्या 182 तक पहुंच गई। अब केडीबी ने इसी वर्ष मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से पहले यह संख्या 200 तक किए जाने का लक्ष्य तय किया है। माना जाता है कि 48 कोस परिधि में 367 तीर्थ थे, जिनमें से अधिकतर किन्हीं कारणों के चलते विलुप्त हो गए।
वर्तमान में किस जिले में कितने तीर्थ
जिला तीर्थों की संख्या
कैथल73
कुरुक्षेत्र46
करनाल40
जींद22
पानीपत-01
तीर्थों के सर्वेक्षण का कार्य जारी : उपेंद्र
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि बोर्ड के अधीन तीर्थों का सर्वेक्षण जारी है। इसके लिए श्रीकृष्ण संग्रहालय प्रभारी बलवान सिंह, राजेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम बनाई हुई है। सूची में शामिल करने के लिए तीर्थ के संबंध में पुख्ता प्रमाणीकरण किया जाता है। जल्द ही नए तीर्थों को भी सूचीबद्ध कर लिया जाएगा।