जागरूकता अभियानों के बावजूद भी फानों में लगाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बेशक इस बार फानों में आग लगाने के मामले पिछले साल के मुकाबले कम हैं, लेकिन इन पर अंकुश लगाना अधिकारियों के लिया चिंता का विषय बना हुआ है। जिले फसल अवशेषों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उपायुक्त के आदेशानुसार अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी ने नोडल अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में आग लगाने वालों पर नकेल कसने के आदेश दिए गए।
एडीसी अखिल पिलानी ने शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में नोडल अधिकारियों को राज्य सरकार के स्पष्ट आदेश सुनाते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र में किसी भी कीमत फसल अवशेषों में आग नहीं लगने देनी है। इसलिए अधिकारी त्योहारों को छोड़कर फील्ड में रहेंगे और आग लगाने वालों लोगों पर सख्त कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि जिला में अब तक 105 एएफएल चिन्हित किए गए हैं, इनमें से 30 मामले सही पाए गए हैं। इन सभी लोगों के चालान किए गए हैं। इनसे 2500 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि अब नोडल अधिकारियों की टीमों के साथ फ्लाईंग स्क्वायड की टीमें भी फसल अवशेषों को आग लगाने वालों पर नजर रखेंगी और उन पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगी। सभी मिलकर आग लगाने वालों पर शिकंजा कसने का काम करेंगे। एडीसी ने कहा कि प्रशासन की तरफ से 2021-22 में 196 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके है। इन सेंटर से किसान कृषि यंत्रों को किराए पर ले सकते है। ग्राम पंचायतों के पास भी 115 कस्टम हायरिंग सेंटर है।
प्रशासन ने फानों में आग लगाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए फ्लाईंग टीमों का गठन करने की निर्णय लिया है। इन टीमों का गठन ब्लाक स्तर पर किया गया है। इस टीम में बीडीपीओ, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी व कृषि विभागों के साथ साथ अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीमें आग लगाने वाले लोगों का जुर्माना लगाने का काम करेंगी। उपायुक्त मुकुल कुमार ने शुक्रवार को ब्लॉक स्तर पर फ्लाईंग स्क्वायड की टीमों का गठन करने का फैसला लेते हुए कहा कि यह टीमें गांव स्तर पर पैनी निगाह रखेंगी।
विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि राज्य सरकार ने आमजन के हित को जहन में रखते हुए फानें जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का फैसला लिया है। इस संबंध में स्वयं मुख्यमंत्री ने सभी आला अधिकारियों को सख्त आदेश भी दिए हैं। इस निर्णय के अनुसार सभी अधिकारी धान के सीजन में सारा कामकाज छोड़कर फील्ड में रहेंगे और फानों की आगजनी की घटनाओं को रोकने का काम करेंगेे। इतनी ही नहीं अधिकारी आग लगाने से होने वाले बुरे प्रभावों के बारे में जागरूक करने का काम भी करेंगे।