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Kurukshetra News: रुक्मिणी विवाह का सुनाया प्रसंग

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कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान मंच पर आशीर्वाद लेने पहुंचे श्रद्धालु। ​विज्ञ​प्ति
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा बैरागी सभा की ओर से सेक्टर-8 में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुने। कथावाचक अनिल शास्त्री ने बताया कि विदर्भ राज्य के राजा भीष्मक के एक पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्र का नाम रुक्मी और पुत्री का नाम रुक्मिणी था।
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राजा भीष्मक अपनी पुत्री से बहुत प्रेम करते थे। उनके विवाह के लिए योग्य वर की तलाश में थे। इस विषय में राजा भीष्मक के सबसे करीबी मित्र व महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश जरासंध को भी पता था। जरासंध को उस वक्त का शक्तिशाली राजा माना जाता था। ऐसा कहा जाता था कि जरासंध का वध कोई नहीं कर सकता।
जरासंध देवी रुक्मिणी को अपनी पुत्री जैसा ही मानते थे। इसलिए वे खुद भी रुक्मिणी के लिए योग्य वर की तलाश में थे लेकिन रुक्मिणी के मन में शुरू से ही भगवान श्रीकृष्ण की छवि बसी हुई थी। बड़े-बड़े महारथी को परास्त करने वाले श्रीकृष्ण की कथा रुक्मिणी कई लोगों के मुंह से सुन चुकी थी। देवी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के विषय में सुनकर ही यह तय कर लिया था कि वे उन्हीं से विवाह करेंगी।
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