कुरुक्षेत्र। टोक्यो की एयरोकावा पवित्र नदी के तट पर गीता आरती करते हुए स्वामी ज्ञानानंद और स्वा
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते श्रीमदभगवद गीता के संदेश की गूंज जापान के अलग-अलग राज्यों व शहरों में सुनाई पड़ रही है। टोक्यो के बाद आज ओसाका की एसेंबली और ओटनी विश्वविद्यालय में भारतीय व जापान के विद्वान गीता के महत्व पर चर्चा करेंगे। वहीं गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। इस दौरान एसेंबली में गीता भी भेंट की जाएगी। इसके अलावा जापान में शांति का नगर कहे जाने वाले क्योटो में सांस्कृतिक गतिविधियाें का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के लिए टोक्यो से संत, श्रद्धालु व अधिकारी सोमवार को ही ओसाका पहुंच गए हैं।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जापान के विद्वानों, राजनेताओं व प्रबुद्वजनों से मुलाकात कर गीता का संदेश उन्हें दे रहे हैं। आज जापान में महोत्सव संपन्न होने के बाद कुरुक्षेत्र के सभी श्रद्धालु वापस लौटेंगे। इस महोत्सव में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, अशोक रोशा, एम के मोदगिल, ऋषिपाल मथाना, विजय नरूला, तुषार सैनी सहित दल जापान पहुंचा हुआ है, जहां 19 जून से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जा रहा है। केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि जापान के लोग गीता संदेश को लेकर काफी उत्साहित हैं। समारोह में जापान की योग माता कीको एकावा के अलावा राजनेता व प्रबुद्वजन भी समारोह का हिस्सा बन रहे हैं। संवाद
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टोक्यो में निकाली गीता सद्भावना यात्रा और अराकावा नदी के तट पर की महाआरती
महोत्सव में टोक्यो की सड़कों से लेकर अराकावा नदी के तट तक अभूतपूर्व आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिला। महोत्सव के एक मुख्य पड़ाव के रूप में विशाल और ऐतिहासिक ''''गीता सद्भावना यात्रा का आयोजन किया गया, जिसने टोक्यो में भारतीय और जापानी संस्कृतियों के अनूठे संगम को जीवंत कर दिया। टोक्यो के फुनाबोरी स्थित इस्कॉन मंदिर में अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गीता यज्ञ का आयोजन किया गया। इस्कॉन के परिसर में गीता यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद, इडोगावा के सांसद योही ओनीशी ने ''गीता सद्भावना यात्रा '' का शुभारंभ करवाया। यात्रा में पारंपरिक जापानी नृत्य कलाकार , संगीतमय मंडलिया, भारतीय पारंपरिक सांस्कृतिक समूह और विभिन्न संगठनों के संकीर्तन दल शामिल हुए। हाथों में भगवा ध्वज थामे और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का सामूहिक उच्चारण करते हुए हजारों श्रद्धालु आगे बढ़ रहे थे। गीता ग्रंथ को तीन सुंदर पालकियों में विराजित कर गीता अनुरागियों भजन गाते हुए आगे चले। स्वामी ज्ञानानंद महाराज के साथ योग माता कीको अकावा ने गीता शीर्ष पर धार यात्रा में भाग लिया। गीता सद्भावना यात्रा भव्य रूप से आध्यात्मिक अराकावा नदी के तट पर पहुंचा, जहां पारंपरिक जापानी ड्रमर्स की गूंजती थापों ने समां बांधा । दीप प्रज्वलित कर गीता आरती की गई।