कुरुक्षेत्र। योग मुद्रा का प्रदर्शन करते मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थी। स्वयं
कुरुक्षेत्र। योग और श्रीमद्भगवद्गीता दोनों ही भारतीय दर्शन और जीवन पद्धति के मूल आधार हैं। योग शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक रूप से संतुलित रखता है। गीता सही कर्म करने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का मार्ग दिखाती है। श्रीमद्भगवद्गीता को मूलतः योगशास्त्र कहा जाता है। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने यह विचार रखे। वह मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर योग संवाद कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने विभिन्न आसन, योग क्रियाओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम में संदीप एवं अर्चना जांगड़ा, कैथल के व्यवसायी विनोद गोयल सपरिवार मौजूद रहे। संवाद