कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट द्वारा श्रावण माह के उपलक्ष्य में शिव शक्ति महायज्ञ एवं शिवमहापुराण कथा के छठे दिन कथावाचक पंडित विकास कौशिक ने द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमा विस्तार से सुनाई। कालेश्वर महादेव मंदिर के समीप मां बाला सुंदरी त्रिपुरेश्वरी श्री दुर्गा देवी यज्ञशाला मंदिर में शिव शक्ति महायज्ञ में मुख्य यजमान पीठाधीश पंडित राजेश मौदगिल सहित, गोपाल शास्त्री,सर्वेश कुमार पांडे,शिव प्रकाश सैनी, मनजीत सैनी, कृत सैनी, भीम सिंह, मनोज गुप्ता आदि ने आहुतियां दी। कालेश्वर महादेव मंदिर सभागार में शिवमहापुराण कथा के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमा विस्तार से बताते हुए कथावाचक पंडित कौशिक ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं,जोकि भारत भर में स्थापित हैं।
इन ज्योतिर्लिंगों की मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में यहां विराजमान हैं। इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन,पूजन और आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में स्थित है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थापित है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में मौजूद है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में उज्जैन नगर से कुछ ही दूरी पर नर्मदा नदी के तट पहाड़ी में बना हुआ है।केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में हिमालय पर्वत पर है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में सह्याद्री पर्वत पर स्थित है। विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में स्थापित है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के तट पर बना है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका के पास स्थित है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के अंतिम छोर पर समुद्र के टापू पर स्थापित है और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है, खासकर सावन के महीने में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति प्रतिदिन इन ज्योतिर्लिंगों के नाम का जाप करता है, उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।