संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। वर्ष 1947 के विभाजन की यादें शुक्रवार को कुरुक्षेत्र के पंचायत भवन में फिर ताजा हो गईं। एक ही छत के नीचे 75 से अधिक बुजुर्ग जुटे तो किसी ने बिछड़े परिवार की कहानी सुनाई तो किसी ने घर-बार छोड़कर जान बचाने के लिए पलायन की दास्तान। बुजुर्गों की जुबानी उस दौर की पीड़ा सुनकर कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
पंजाबी बिरादरी महासभा की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर बुजुर्गों के सम्मान और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें वर्ष 1935 से 1947 के बीच जन्मे बुजुर्ग शामिल हुए। महासभा की ओर से करीब 75 बुजुर्गों को पगड़ी, शॉल और सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया गया। इनमें करीब 10 महिलाएं भी थीं। कार्यक्रम में करीब 200 परिवारों के सदस्य भी पहुंचे।
बुजुर्गों ने बताया कि विभाजन के समय उन्हें अपना घर, सामान, जमीन और कारोबार तक छोड़कर निकलना पड़ा। परिवारों के बिछड़ने और हिंसा की यादें सुनाते हुए कई बुजुर्ग भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उस समय सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों की जान बचाने की थी।
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बांसुरी की धुन पर हुआ राष्ट्रगान, दिखाई डॉक्यूमेंट्री
डॉ. मनीष कुकरेजा ने बांसुरी पर राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उनकी ओर से तैयार करीब 10 मिनट की डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
मंच से सुनाई अपनी आपबीती
रतन चंद सरदाना, धरमचंद गांधी, अविनाशी लाल अरोड़ा, मक्खन लाल रल्हन, डॉ. अमीर चंद नागपाल, ओपी गुलियानी, डॉ. एनसी मुरेजा, राधेश्याम लांबा, सहित बुजुर्गों ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने परिवारों से बिछड़ने, घर छोड़ने और उस दौर में झेली गई परेशानियों को याद किया।