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पॉलिथीन का प्रयोग जारी, पर्यावरण पर भारी

Tue, 24 May 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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The continuing use of polythene on the environment, heavy - फोटो : अमर उजाला
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 जिले में एनजीटी के आदेशों की खूब धज्जियां उड़ रही हैं। प्रतिबंध के बावजूद पॉलिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। अधिकारी भी इस पर आंख मूंदे बैठे हैं।
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कुरुक्षेत्र शहर में छोटा रेलवे स्टेशन, थीम पार्क, गीता कॉलोनी, कीर्ति नगर, गांधी नगर, झांसा रोड, मोहन नगर, सेक्टर सात और दस का डिवाइडिंग रोड, नरकातारी रोड, सलारपुर रोड, लघु सचिवालय के निकट, यूनिवर्सिटी परिसर सहित अन्य स्थानों पर पॉलिथीन का अंबार लगा है। इसके अलावा कस्बों के गांवों में भी पॉलिथीन खूब इस्तेमाल में किया जा रहा है।

केयू में समाजशास्त्र एवं पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. विजेंद्र बजार्ड के अनुसार अधिकांश बार देखा गया है कि बाहर पड़े कूड़ा-कर्कट सहित पॉलिथीन के अंबार में आग लगा दी जाती है। पॉलिथीन से सबसे जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस पर्यावरण में प्रवेश करती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए पॉलिथीन का इस्तेमाल पूरी तरीके से बंद होना चाहिए।
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इसके स्थान पर कपड़े के थैले और जैविक रूप से नष्ट होने वाले बैग उपयोग में लाए जा सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि यहां प्रदूषण मुक्त शहर बनाने के लिए कचरा प्रबंधन सिस्टम शुरू किया जाए।
 
जहां बनते हैं, वहीं कार्रवाई क्यों नहीं करती सरकार
पॉलिथीन प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। शहर और गांव में दुकानदारों को कभी-कभार चेतावनी भी दी जाती है। इसके तहत जुर्माना व सजा की बात कहकर उन्हें डराया जाता है, लेकिन बड़ी बात यह है कि जिन फैक्ट्रियों में इसका निर्माण होता है, उन पर आखिर क्यों कार्रवाई हो पाती? पाबंदी के बावजूद पॉलिथीन रास्ते में ही जब्त क्यों नहीं हो पाता?

शिक्षा के गढ़ में भी प्रदूषण हावी  
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (केयू) में भी पॉलिथीन का खूब प्रयोग होता है। यहां केयू परिसर में शिक्षा का गढ़ होने के बावजूद पॉलिथीन में बेझिझक आग लगा दी जाती है। न तो इसे कोई विद्यार्थी बुझाता और न ही कर्मचारी ही जहमत उठाता है। इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकारी संपत्ति का भी नुकसान हो रहा है।

ये कहता है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा में किसी भी क्षेत्र में पॉलिथीन सहित प्लास्टिक के कैरी बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया कि इसका प्रयोग करने वाले पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके बावजूद पॉलिथीन व प्लास्टिक सामान का धड़ल्ले से प्रयोग करके एनजीटी के आदेशों का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।

कमेटी की ओर से छह सदस्यीय टीम बनाई गई है, जो पॉलिथीन रखने वाली दुकानों का समय-समय पर चालान करती है। इसके अलावा दो हजार पांच सौ रुपये से पांच हजार तक जुर्माना भी किया जाता है। उन्होंने नगर परिषद क्षेत्र के दुकानदारों को चेतावनी दी कि आदेश का पालन करते हुए पॉलिथीन रखना व बेचना बंद करें अन्यथा कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- कर्म चंद, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद  

जिले में पॉलिथीन की बढ़ती उपयोगिता से वे चिंतित हैं। पॉलिथीन मुक्त शहर बनाने के लिए नगर परिषद चुनाव (25 मई) के बाद खासतौर पर मीटिंग बुलाई जाएगी। वहीं गांवों में भी यह समस्या गंभीर रूप धारण कर रही है। बैठक में इस समस्या से सख्ती से निपटने को ठोस निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने लोगों से पॉलिथीन इस्तेमाल न करने की अपील की।
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- सतबीर कुंडू, एसडीएम
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