कुरुक्षेत्र। बारना स्थित सुपर-100 संस्थान का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अभिभावकों को बच्चों से न मिलने देना, उनको जबरन अंदर रोके रखना, छात्रों के साथ मारपीट, पौष्टिक भोजन न देना और भीषण गर्मी में गर्म पानी पिलाने जैसे गंभीर आरोपों के बीच अब मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता ढुल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर संस्थान में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और इच्छा के विरुद्ध रोककर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि संस्थान में आईआईटी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के नाम पर बच्चों को हॉस्टल में रखा जाता है लेकिन वहां मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि बच्चों को समय पर अभिभावकों से मिलने नहीं दिया जाता और जब परिजन बच्चों को वापस ले जाने पहुंचते हैं तो उन्हें अधिकारियों के चक्कर कटवाए जाते हैं। संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बच्चों को खराब खाना दिया जा रहा है और पीने के लिए दूषित पानी मिल रहा है। यहां तक कि वार्डन के द्वारा उनके साथ मारपीट की जाती है।
बुधवार को सोनीपत, सफीदों समेत कई जिलों से पहुंचे अभिभावकों ने कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग पर जाम लगा दिया था। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन ने किसी तरह हालात संभाले और अभिभावकों को बच्चों से मिलवाया। सोनीपत से पहुंची एक महिला ने आरोप लगाया कि उनके पौत्र को पिछले 10 दिनों से बुखार था, लेकिन उसे दवाई तक नहीं दिलवाई गई। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि वह पांच दिन पहले ही संस्थान छोड़ चुकी थी, क्योंकि वहां न खाने को रोटी मिलती थी, न पीने को साफ पानी और छात्राओं के साथ मारपीट की जाती थी। हनुमानगढ़ से बेटे को लेने पहुंचे एक अभिभावक ने आरोप लगाया कि बच्चों को सुबह-शाम केवल चावल दिए जाते हैं, जिससे उनकी तबीयत खराब हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि संस्थान में बच्चों को फोन तक नहीं करने दिया जाता और पूरा माहौल जेल जैसा बना दिया गया है, इससे पहले 22 मई को भी तीन छात्राएं संस्थान की दीवार फांदकर अपने घर भाग गईं थी। उस मामले में भी सुपर 100 का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया था।
करीब 50 बच्चे छोड़ चुके संस्थान
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि अब तक करीब 50 बच्चे संस्थान छोड़ चुके हैं। बुधवार को हुए हंगामे के बाद 10 बच्चे वापस गए थे जबकि वीरवार को भी कई अभिभावक बच्चों को लेने पहुंचे, इनमें से पांच अपने बच्चों को साथ ले गए। इसके अलावा कुछ बच्चे स्वयं भी संस्थान छोड़कर जा रहे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी ने एक हफ्ते में किया दूसरा दौरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने एक सप्ताह के भीतर संस्थान का दूसरा दौरा किया, उनके साथ इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिद्धू और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया और बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। जिला शिक्षा अधिकारी और एसएचओ ने विद्यार्थियों को अपने फोन नंबर भी उपलब्ध कराए।