कुरुक्षेत्र। यदि नारी एक बार कोई निश्चय कर लेती है तो उसे वह जरूर पूरा करती है। सावित्री अपने पति सत्यवान को जीवित करने का निर्णय ले लेती है तो यम से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लाती है। सत्यवान सावित्री के सांग ने रत्नावली समारोह के तीसरे दिन खुले मंच पर दर्शकों को बांधे रखा। एनआईएलएम यूनिवर्सिटी ने सत्यवान और सावित्री पर आधारित सांग प्रस्तुत किया। यह एक पौराणिक कथा पर आधारित था जिसमें नारी शक्ति, सच्चे प्रेम और अटूट पवित्रता की मिसाल की कहानी बड़े ही सहज ढंग से प्रस्तुत की। दूसरी प्रस्तुति में आरकेएसडी कॉलेज, कैथल की टीम ने पिंगला भरतरी पर अपनी प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में उज्जैन के राजा भरथरी और रानी पिंगला की कहानी है जिसमें भोग विलास में लिप्त राजा को तब ज्ञान प्राप्त होता है जब उसे अपनी रानी की बेवफाई का अहसास होता है।
ऑन द स्पाॅट पेंटिंग में दिखी हरियाणा की लोक संस्कृति : क्रश हाल में आयोजित ऑन द स्पाॅट पेंटिंग में हरियाणा की लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी। भिन्न भिन्न शिक्षा संस्थानों की 30 टीमों ने भाग लिया जिसमें कलाकारों ने हरियाणा की ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक, पौराणिक लोक जीवन, वेशभूषा, रहन-सहन, जीवन शैली के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों, का संदेश देते हुए अपनी पेंटिंग बनाई।