कुरुक्षेत्र। जिओ गीता की ओर से गीता ज्ञान संस्थानम् में पांच दिवसीय गीता चेतना शिविर आयोजित किया गया जिसका समापन बुधवार को हुआ। स्वामी ज्ञानानंद ने श्रीमद्भगवद् गीता के 18वें अध्याय मोक्ष संन्यास योग का भावपूर्ण गूढ़ व अत्यंत जीवनोपयोगी विवेचन किया।
उन्होंने कहा कि गीता का 18वां अध्याय संपूर्ण गीता का सार है जिसमें कर्म, ज्ञान, भक्ति और संन्यास का अनूठा समन्वय दिखाई देता है। सच्चा संन्यास कर्मों का त्याग नहीं बल्कि कर्म फल की आसक्ति का त्याग है। जब मनुष्य अपने सभी कर्म परमात्मा को समर्पित भाव से करता है, तो वही कर्म मोक्ष का साधन बन जाते हैं।
डॉ. विवेक कोहली ने कहा कि गीता चिंतन शिविर साधकों के लिए आत्मिक शांति, सदगुणों के विकास एवं जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली अमूल्य प्रेरणा सिद्ध हुए हैं। गीता चिंतन के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं साधकों ने गहन शांत आत्मिक संतोष एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।
ध्यान का अर्थ केवल मंत्र जाप नहीं : स्वामी ज्ञानानंद
कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्थानम में ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इसमें साधकों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि ध्यान का अर्थ केवल मंत्र जाप नहीं है बल्कि अपने भीतर संचित विचारों, विकारों और अहंकार को शून्य करना ही सच्चा ध्यान है। जब साधक भीतर से लिप्त होता है, तभी उसकी चेतना जागृत होती है और वह परमात्मा से साक्षात जुड़ता है।
ध्यान स्वयं में चेतना का विकास है। परमात्मा कोई बाहर की सत्ता नहीं बल्कि स्वयं के भीतर ही विद्यमान है। उन्होंने कहा कि मन स्वभाव से चंचल होता है, किंतु निरंतर ध्यान साधना से मन शुद्ध होता है और चेतना का स्तर ऊंचा उठता है। यही विकसित चेतना मनुष्य को भय, तनाव और अशांति से मुक्त कर आत्मिक आनंद की अनुभूति कराती है।
गत देर रात्रि गीता ज्ञान संस्थानम स्थित श्री कृपा बिहारी जी के मंदिर में सकट चतुर्थी का पावन पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने श्री गणेश जी का पूजन अर्चन श्रद्धा भक्तिभाव से किया। गणेश जी को 108 मोदकों द्वारा अर्चन किया गया। पूजन के दौरान भगवान गणेश से सभी श्रद्धालुओं की सुख समृद्धि एवं मंगल कामना की गई। स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि भगवान विघ्नहर्ता और उनकी आराधना से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं।
कुरुक्षेत्र। सकट चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा अर्चना करते स्वामी ज्ञानानंद। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। सकट चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा अर्चना करते स्वामी ज्ञानानंद। विज्ञप्ति