कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण धुरी शिक्षक ही हैं। इस नीति में बदलाव शिक्षकों के प्रयास से ही संभव है और शिक्षक ही देश की भावी पीढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से अवगत करवा सकते हैं। जब देश की भावी पीढ़ी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ग्रहण करेगी तो निश्चित की भावी पीढ़ी को भारत के इतिहास, संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जानने का अवसर मिलेगा तो निश्चित ही देश वर्ष 2047 तक विश्व गुरु बनकर उभरेगा।
ये विचार शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में रविवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय शिक्षा, संस्कार, मूल्य और आपके सुझाव विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने का सबसे बड़ा फार्मूला शिक्षक के हाथ में है। इस फार्मूले के तहत शिक्षक को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को जन-जन तक पहुंचाने की कमान संभालनी होगी तथा इसे सफल बनाने का संकल्प लेना होगा।
इस दौरान निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी ने सुझाव देने के लिए शिक्षकों को विस्तार से पोर्टल के बारे में जानकारी दी तथा मौके पर कई शिक्षकों ने एनईपी को लागू करने में आ रही परेशानियों को सामने रखा। इसी के साथ अन्य वक्ताओं ने भी नई शिक्षा नीति में सुधार को लेकर सुझाव दिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, स्कूल शिक्षा के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, उच्च शिक्षा परिषद के वाइस चेयरमैन प्रो. सुरेंद्र गक्खड, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।